मुजफ्फरपुर। शहर में भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश पर सुबह आठ बजे से लागू होने वाली नो-एंट्री को अब सुबह छह बजे से लागू करने के प्रशासनिक निर्णय का खाद्यान्न कारोबारियों ने विरोध किया है। कारोबारियों का कहना है कि शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने और जाम की समस्या कम करने के उद्देश्य से लिया गया निर्णय खाद्यान्न व्यापार के लिए परेशानी बढ़ाने वाला साबित होगा। इससे मंडी और गोदामों तक माल पहुंचाने, ट्रकों से खाद्यान्न उतरवाने तथा पल्लेदारों की व्यवस्था में बदलाव करना पड़ेगा।

खाद्यान्न कारोबारियों के अनुसार शहर में बाहर से आने वाला अधिकांश माल भारी मालवाहक वाहनों के माध्यम से पहुंचता है। ट्रकों में अनाज, दाल, चावल, आटा और अन्य खाद्य सामग्री आती है। इन वाहनों से माल उतारने के लिए व्यापारियों के साथ बड़ी संख्या में पल्लेदारों की जरूरत होती है। वर्तमान व्यवस्था के तहत कारोबारी सुबह आठ बजे तक मालवाहक वाहनों की आवाजाही कराकर माल उतरवाने की प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं। लेकिन नो-एंट्री का समय दो घंटे पहले किए जाने से यह पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी।

कारोबारियों ने बताया कि यदि सुबह छह बजे से भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया तो ट्रकों को इससे पहले ही शहर में प्रवेश कराना होगा। ऐसे में रात के समय ही ट्रकों से माल उतरवाने की नौबत आ सकती है। इसके लिए व्यापारियों और पल्लेदारों को देर रात से ही काम पर बुलाना पड़ेगा। इससे श्रमिकों की उपलब्धता, सुरक्षा और अतिरिक्त श्रम लागत जैसी समस्याएं सामने आएंगी। छोटे कारोबारियों के लिए इसका सीधा असर कारोबार की लागत पर पड़ने की आशंका है।

व्यापारियों का तर्क है कि खाद्यान्न कारोबार सामान्य दुकानों की तरह केवल दिन के समय होने वाला व्यवसाय नहीं है। बाहर से आने वाले वाहनों की आवाजाही, माल की अनलोडिंग, वजन, भंडारण और फिर दुकानों तक आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया एक-दूसरे से जुड़ी होती है। नो-एंट्री का समय अचानक दो घंटे पहले किए जाने से इस पूरी श्रृंखला का समय बिगड़ जाएगा। इसका असर न केवल कारोबारियों और पल्लेदारों पर पड़ेगा, बल्कि बाजार में खाद्यान्न की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

कारोबारियों ने यह भी कहा कि शहर में जाम की समस्या को नियंत्रित करना जरूरी है और वे यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रशासन के प्रयासों के विरोध में नहीं हैं। उनका कहना है कि भारी वाहनों के लिए नो-एंट्री का समय निर्धारित करते समय शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों और खाद्यान्न बाजार की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। यदि सुबह छह बजे से नो-एंट्री लागू की जाती है तो व्यापारिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध समय कम हो जाएगा और माल की आपूर्ति में देरी होने की संभावना बढ़ेगी।

संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूर्व में सुबह आठ बजे से नो-एंट्री लागू होने की व्यवस्था लंबे समय से चल रही थी और कारोबारी उसी के अनुरूप अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे थे। अचानक समय में बदलाव करने से व्यापारियों के सामने नई व्यावहारिक दिक्कतें खड़ी होंगी। इसलिए प्रशासन को सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था भी बेहतर हो और खाद्यान्न कारोबार भी प्रभावित न हो।

कारोबारियों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो भारी वाहनों के आवागमन को व्यवस्थित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा सकती है। मालवाहक वाहनों के लिए निर्धारित मार्ग, समयबद्ध प्रवेश या व्यापारिक क्षेत्रों के लिए अलग नियम बनाए जा सकते हैं। इससे जाम की समस्या पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ व्यापारियों को भी राहत मिल सकती है।

खाद्यान्न संघ ने प्रशासन से आग्रह किया है कि नो-एंट्री के नए समय को लागू करने से पहले व्यापारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। संघ का कहना है कि सुबह छह बजे से नो-एंट्री लागू करने के बजाय पूर्व की तरह सुबह आठ बजे से व्यवस्था जारी रखी जाए। यदि समय में बदलाव जरूरी माना जा रहा है तो इसके लिए व्यापारियों, परिवहन कारोबारियों और पल्लेदारों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सहमति बनाई जाए।

व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि वे शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के प्रयासों में प्रशासन का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ऐसा कोई निर्णय नहीं होना चाहिए जिससे खाद्यान्न की आवक-जावक और रोजमर्रा के कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। अब खाद्यान्न कारोबारियों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। संघ को उम्मीद है कि उनकी आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए नो-एंट्री के समय में बदलाव के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाएगा और पूर्व व्यवस्था बहाल की जाएगी।

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