बिहार : शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट एवं कार्ययोजना के तहत राज्य में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC) के संचालन को मंजूरी दी गई है। इन स्वास्थ्य केंद्रों के शुरू होने से शहरों और तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।

शहरी आबादी के लगातार बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए जिला अस्पतालों और बड़े सरकारी अस्पतालों का रुख करते हैं। ऐसे में प्राथमिक स्तर पर ही सामान्य बीमारियों की जांच, उपचार, परामर्श और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। नए UPHC और UHWC के संचालन से लोगों को अपने घर के आसपास ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे संचालित

वित्तीय वर्ष 2026-27 की स्वीकृत बजट एवं कार्ययोजना के तहत बिहार में 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन को मंजूरी दी गई है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों को प्राथमिक स्तर पर उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का शुरुआती स्तर पर ही समाधान करने की कोशिश की जाएगी।

शहरी क्षेत्रों में सामान्य बुखार, संक्रमण, रक्तचाप, मधुमेह सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को अक्सर बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क मजबूत होने से ऐसी स्वास्थ्य जरूरतों को स्थानीय स्तर पर पूरा करने में मदद मिल सकती है। गंभीर या जटिल मामलों में मरीजों को आवश्यकता के अनुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जा सकेगा।

434 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को भी मंजूरी

इसके अलावा बिहार में 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के संचालन को भी स्वीकृति दी गई है। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की अवधारणा केवल बीमारी का उपचार करने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ स्वास्थ्य जागरूकता, बीमारी की रोकथाम और समय पर जांच जैसी सुविधाओं से जोड़ना भी है।

शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों के माध्यम से लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और सामान्य बीमारियों की समय रहते पहचान करने पर जोर दिया जा सकता है। इससे बीमारी के गंभीर होने से पहले उपचार शुरू करने में मदद मिलेगी। खासकर ऐसे परिवारों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, जिन्हें छोटी स्वास्थ्य समस्या के लिए भी बड़े अस्पताल तक जाना पड़ता है।

शहरों में बढ़ती आबादी को मिलेगा लाभ

बिहार के कई शहरों में पिछले वर्षों में आबादी और आवासीय क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। नए मोहल्लों और शहरी बस्तियों के विकसित होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की मांग भी बढ़ी है। कई इलाकों में लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अपेक्षाकृत अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।

नए स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों और ऐसे शहरी इलाकों में जहां सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत अधिक है, वहां इन केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधा मिलने से मरीजों का समय और आने-जाने का खर्च भी बच सकता है।

सरकारी अस्पतालों पर कम होगा दबाव

प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का एक बड़ा उद्देश्य बड़े सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते मरीजों के दबाव को कम करना भी है। वर्तमान में सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेज अस्पतालों तक पहुंचते हैं। इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों और बड़े अस्पतालों के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

यदि प्राथमिक स्तर पर ही सामान्य बीमारियों की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो, तो गंभीर मामलों के लिए बड़े अस्पतालों के संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था को प्राथमिक से लेकर उच्च स्तर तक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जागरूकता पर भी जोर

नए केंद्रों के माध्यम से उपचार के साथ लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की दिशा में भी काम किया जा सकता है। नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण, स्वच्छता, संक्रमण से बचाव और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम जैसे विषयों पर लोगों को जानकारी उपलब्ध कराना प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर टिकी होती है। यदि बीमारी की पहचान शुरुआती स्तर पर हो जाए और समय पर उपचार मिल जाए तो गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

बिहार में 164 UPHC और 434 UHWC के संचालन की मंजूरी को राज्य की शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के नजदीक पहुंचाने की कोशिश को गति मिलेगी।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की बजट एवं कार्ययोजना के तहत मिली यह मंजूरी आने वाले समय में बिहार के शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का आधार बनेगी। नए केंद्रों के प्रभावी संचालन के साथ यदि चिकित्सकीय स्टाफ, आवश्यक दवाओं, जांच सुविधाओं और नियमित स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है, तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिल सकता है। केंद्र और राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की यह पहल बिहार के शहरों में प्राथमिक उपचार को अधिक सुलभ और मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

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