पटना :  बिहार में कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ सकता है। राज्य में IG, DIG और SP स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मजिस्ट्रेट की शक्तियां देने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह व्यवस्था लागू होने के बाद कुछ मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर ही निर्णय ले सकेंगे।
यह कदम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत उठाए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करना और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
ऑन द स्पॉट लिए जा सकेंगे फैसले
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अधिकार मिलने के बाद संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कुछ परिस्थितियों में मजिस्ट्रेट की भूमिका से जुड़े अधिकारों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर कार्रवाई के लिए अलग-अलग स्तरों पर अनुमति लेने में लगने वाला समय कम हो सकता है। हालांकि, इन शक्तियों का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में और किस सीमा तक किया जाएगा, यह संबंधित सरकारी आदेश और अधिसूचना में स्पष्ट किया जाएगा।
BNSS के तहत बदलाव की तैयारी
देश में आपराधिक कानूनों में बदलाव के बाद BNSS ने पुराने दंड प्रक्रिया कानून (CrPC) की जगह ली है। नए कानून के तहत राज्यों को अपनी प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था के अनुरूप विभिन्न प्रावधान लागू करने का अधिकार है। बिहार में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मजिस्ट्रेट संबंधी शक्तियां देने की प्रक्रिया को लेकर तैयारी अंतिम चरण में बताई जा रही है। अंतिम निर्णय के बाद इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है।
कानून-व्यवस्था में तेजी पर जोर
सरकार और प्रशासन का फोकस कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में त्वरित निर्णय लेने और पुलिस-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर है। विशेष परिस्थितियों में मौके पर तेजी से निर्णय लेने की क्षमता से पुलिस की प्रतिक्रिया व्यवस्था मजबूत हो सकती है। हालांकि, मजिस्ट्रेट की शक्तियां पुलिस अधिकारियों को मिलने से जवाबदेही, अधिकारों की सीमाओं और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल उठेंगे। इसलिए अंतिम नियम और कार्यप्रणाली स्पष्ट होने के बाद ही इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव सामने आएगा।
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