बिहार: जीएसटी से जुड़े कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ई-वे बिल प्रणाली में लागू होने वाला नया "शिप टू जीएसटीएन" नियम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 1 अगस्त से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। सरकार के इस फैसले से देशभर के व्यापारियों को नई प्रणाली के अनुसार तैयारी करने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।
प्रस्तावित "शिप टू जीएसटीएन" नियम के तहत जीएसटी पंजीकृत खरीदार को माल भेजते समय ई-वे बिल में संबंधित खरीदार का जीएसटीएन नंबर दर्ज करना अनिवार्य किया जाना था। यदि ई-वे बिल में सही जीएसटीएन जानकारी उपलब्ध नहीं होती तो बिल जनरेट करने की प्रक्रिया में परेशानी आ सकती थी। इस बदलाव का उद्देश्य माल परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और गलत जानकारी के आधार पर होने वाले लेन-देन को रोकना था।
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई कारोबारी दूसरे पंजीकृत व्यापारी को सामान भेजता है तो ई-वे बिल बनाते समय भेजे जाने वाले स्थान और खरीदार की जीएसटी पहचान से जुड़ी जानकारी देना जरूरी होता। इससे सरकार को माल की आवाजाही को बेहतर तरीके से ट्रैक करने में मदद मिलती और टैक्स चोरी पर रोक लगाने में सहायता मिलती।
हालांकि, व्यापारिक संगठनों और छोटे कारोबारियों ने इस नए नियम को लागू करने से पहले अतिरिक्त समय की मांग की थी। कारोबारियों का कहना था कि नई व्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर में बदलाव, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और रिकॉर्ड सिस्टम को अपडेट करने की जरूरत है। अचानक नियम लागू होने से छोटे और मध्यम व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था।
कारोबारियों की मांग को देखते हुए सरकार ने फिलहाल इस व्यवस्था को स्थगित करने का फैसला लिया है। इससे व्यापारियों को राहत मिली है और अब वे बिना किसी दबाव के नए नियमों की तैयारी कर सकेंगे। खासतौर पर छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों को इससे फायदा होगा।
इसके अलावा, प्रस्तावित नियमों में अपंजीकृत खरीदारों के लिए भी बदलाव की तैयारी थी। ऐसे मामलों में ई-वे बिल बनाते समय यूआरपी यानी अनरजिस्टर्ड पर्सन कोड दर्ज करना जरूरी किया जा रहा था। सरकार की योजना थी कि बिना सही जानकारी के ई-वे बिल तैयार न हो सके, जिससे माल की आवाजाही में अधिक पारदर्शिता लाई जा सके।
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही नया नियम फिलहाल लागू नहीं हुआ है, लेकिन कारोबारियों को इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। भविष्य में जब यह व्यवस्था लागू होगी तो जिन व्यापारियों ने पहले से अपनी तैयारी कर ली होगी, उन्हें कम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता प्रदीप कुमार वर्मा ने बताया कि फिलहाल ई-वे बिल की पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी। कारोबारियों को अभी पहले की तरह ही ई-वे बिल बनाना होगा। उन्होंने व्यापारियों को सलाह दी कि वे नई प्रणाली को समझें और अपने सॉफ्टवेयर तथा रिकॉर्ड व्यवस्था को धीरे-धीरे अपडेट करना शुरू करें।
जीएसटी व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं ताकि टैक्स प्रक्रिया को आसान और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। हालांकि, किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापारियों को पर्याप्त समय देना जरूरी होता है। शिप टू जीएसटीएन नियम के स्थगन से कारोबारियों को यही अतिरिक्त समय मिल गया है।
फिलहाल देशभर में पुरानी ई-वे बिल प्रणाली ही लागू रहेगी। सरकार की ओर से नई तारीख या आगे की प्रक्रिया को लेकर जानकारी जारी किए जाने के बाद ही इस नियम को लागू किया जाएगा। तब तक कारोबारी मौजूदा नियमों के अनुसार ही अपना व्यापार और माल परिवहन जारी रख सकेंगे।