पश्चिम चंपारण जिले: नरकटियागंज प्रखंड के गोखुला गांव में मिजल्स यानी खसरा के दो मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। संक्रमण को नियंत्रित करने और बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए गांव में विशेष निगरानी, स्वास्थ्य सर्वे और टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों को सक्रिय करते हुए प्रभावित परिवारों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।
अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि गोखुला गांव की 13 वर्षीय दिव्या कुमारी और 9 वर्षीय गुलशन कुमार में मिजल्स संक्रमण की पुष्टि हुई है। दोनों बच्चों के रक्त नमूने जांच के लिए पटना भेजे गए थे, जहां से रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।
संक्रमण की जानकारी मिलने के बाद गांव में स्वास्थ्य कर्मियों की टीम भेजी गई। टीम ने प्रभावित इलाकों में जाकर बच्चों और ग्रामीणों की जांच की। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गांव में 9 महीने से 5 वर्ष तक के 204 बच्चों का विशेष सर्वे कराया गया है। सभी बच्चों को विटामिन-ए की खुराक दी गई है, जिससे बीमारी की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग ने मिजल्स से बचाव के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। पात्र बच्चों को खसरे से बचाव का टीका लगाया जाएगा। इसके अलावा एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी संदिग्ध मरीज की जानकारी तुरंत विभाग को दें, ताकि समय पर जांच और इलाज शुरू किया जा सके।
मिजल्स एक बेहद संक्रामक बीमारी है, जो रूबियोला वायरस के कारण होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है, लेकिन जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, वे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए यह वायरस तेजी से फैलता है।
मिजल्स के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, सूखी खांसी, नाक बहना, आंखों में लालिमा और पानी आना शामिल हैं। कई मामलों में मुंह के अंदर गाल की सतह पर छोटे सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। इसके बाद चेहरे और कान के पीछे से लाल चकत्ते निकलने लगते हैं, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकते हैं। चकत्ते निकलने के दौरान बुखार भी बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को समय पर मिजल्स का टीका लगवाना बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार 9 से 12 महीने की उम्र में पहली और 16 से 24 महीने की उम्र में दूसरी खुराक दी जाती है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति को छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं से दूरी बनाकर रखना चाहिए।
मिजल्स से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है। बार-बार साबुन से हाथ धोना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना और बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के अनुसार बच्चों को विटामिन-ए की खुराक देने से बीमारी के गंभीर प्रभावों को कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी बच्चे में बुखार, खांसी, आंखों में लालिमा या शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। विभाग की टीमें लगातार गांव में निगरानी कर रही हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।