पटना : बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत ड्रैगन बोट खेल में पदक हासिल करने के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों की अब व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार को आशंका है कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेल प्रतिभाओं को सरकारी सेवा में अवसर देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का कुछ मामलों में गलत तरीके से लाभ उठाया गया है। इसी को देखते हुए संबंधित विभाग ने योजना के तहत नियुक्त खिलाड़ियों की पात्रता, उपलब्धियों और चयन प्रक्रिया की समीक्षा करने का निर्णय लिया है।
सरकार के इस फैसले के बाद खेल विभाग और संबंधित एजेंसियां उन सभी मामलों की जांच करेंगी, जिनमें ड्रैगन बोट खेल के आधार पर खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी गई है। जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियुक्तियां निर्धारित नियमों और पात्रता मानकों के अनुरूप हुई हैं या नहीं। यदि किसी मामले में अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
बिहार सरकार ने खिलाड़ियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने और राज्य का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने वाली प्रतिभाओं को सम्मान देने के उद्देश्य से ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर सरकारी नौकरी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। योजना का उद्देश्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक सुरक्षा देना और युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना था।
हाल के दिनों में सरकार के संज्ञान में ऐसे मामले आए, जिनमें यह आशंका जताई गई कि ड्रैगन बोट खेल के नाम पर योजना का अनुचित लाभ उठाया गया। आरोप है कि कुछ खिलाड़ियों ने ऐसी प्रतियोगिताओं के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की, जिनकी मान्यता, स्तर या पात्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी कारण सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का फैसला लिया है।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान खिलाड़ियों द्वारा प्रस्तुत पदकों, प्रमाण-पत्रों, प्रतियोगिताओं की मान्यता, आयोजन करने वाली संस्थाओं और चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि जिन प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने पदक हासिल किए थे, वे राज्य और केंद्र सरकार की खेल नीति के अनुरूप मान्यता प्राप्त थीं या नहीं।
खेल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य किसी खिलाड़ी को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र खिलाड़ियों तक ही पहुंचे। यदि किसी खिलाड़ी ने पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत नौकरी प्राप्त की है तो उसे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जांच केवल तथ्यों की पुष्टि और योजना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने जैसी योजनाएं तभी प्रभावी हो सकती हैं, जब उनमें पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे। यदि अपात्र लोग नियमों का दुरुपयोग कर लाभ प्राप्त करते हैं तो इससे वास्तविक खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होता है और पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
राज्य के खेल जगत से जुड़े कई लोगों ने भी सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इससे ईमानदारी से मेहनत करने वाले खिलाड़ियों के हितों की रक्षा होगी और भविष्य में योजनाओं का दुरुपयोग रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए ताकि निर्दोष खिलाड़ियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी व्यक्ति ने गलत दस्तावेज, फर्जी प्रमाण-पत्र या भ्रामक जानकारी के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों और प्रचलित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें नियुक्ति रद्द करने से लेकर अन्य कानूनी कार्रवाई तक की संभावना हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और संबंधित नियमों के आधार पर ही लिया जाएगा।
बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। इस योजना के माध्यम से अनेक खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर मिला है और इससे युवाओं में खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ी है। लेकिन किसी भी योजना की सफलता उसके पारदर्शी और निष्पक्ष क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
सरकार का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की खामी सामने आती है तो भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे। इसमें पात्रता मानकों को और स्पष्ट करना, प्रमाण-पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत बनाना तथा चयन प्रणाली में अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था लागू करना शामिल हो सकता है।
फिलहाल ड्रैगन बोट खेल के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने वाले सभी खिलाड़ियों की जांच की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। अब सभी की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि योजना के तहत हुई नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के अनुरूप थीं या कहीं इसका दुरुपयोग हुआ। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर की जाएगी तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।