मानपुर। छह महीने में पैसा डबल करने के झांसे में मानपुर के आम लोगों के साथ-साथ नेता और सरकारी अधिकारी व कर्मचारी भी आ गए। इनका जाल बालाघाट के लांजी, गोंदिया से लेकर चंद्रपुर और मानपुर तक फैला। कुछ ही सालों में करीब 500 करोड़ रुपए लोगों से ठगे गए।
हाल ही में बालाघाट पुलिस ने इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बताया गया कि एक एसआईटी भी इसकी जांच कर रही है, जिसमें रिमांड पर लिए गए आरोपियों से 18.61 करोड़ की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, 14.82 करोड़ के 617 चेक और 122 जमीनों की रजिस्ट्री बरामद हुई है। पुलिस का कहना है कि जब्त रजिस्टरों के आधार पर सभी निवेशकों की सुनवाई कर उन्हें राशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
20 जुलाई को पुलिस ने चार साल से फरार मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने समेत उसके सात साथियों तामेश मंसूरे, राकेश मंसूरे, प्रदीप कंकरायने, दिनेश कंकरायने, रामप्रसाद मंसूरे, प्रद्युमन कंकरायने और रूखचंद हरदे को गिरफ्तार किया। इन पर 63 से ज्यादा मामले दर्ज है। सभी से पूछताछ जारी है। एसआईटी प्रमुख एवं सीएसपी मयंक तिवारी के अनुसार मुख्य आरोपियों प्रद्युमन कंकरायने, रामप्रसाद मंसुरे और दिनेश कंकरायने के ठिकानों से 122 जमीनों की रजिस्ट्रियां मिली हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 18.61 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 20 रजिस्टर, भूमि ऋण पुस्तिका, पावर ऑफ अटॉर्नी, लगभग 1500 कोरे चेक, 59 बैंक इंस्टा किट, टैक्स और जीएसटी रिटर्न से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि जब्त रजिस्टरों में दर्ज सभी निवेशकों की पहचान कर उनकी सुनवाई की जाएगी, ताकि कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी रकम वापस दिलाई जा सके। इस संबंध में जल्द ही पुलिस विभाग प्रक्रिया शुरू करेगा।
जांच के अनुसार, लांजी क्षेत्र से संचालित इस नेटवर्क ने वर्ष 2016-17 से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के लोगों को 6 से 9 महीने में रकम दोगुनी करने का लालच देकर करोड़ों रुपए निवेश कराए। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी जमानत पर छूटकर फरार हो गए थे। जांच में पहले ही सामने आ चुका है कि इस नेटवर्क के तार छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर और राजनांदगांव तक जुड़े थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मोहला-मानपुर क्षेत्र के निवेशकों के भी करीब 10 करोड़ इस कथित डबल मनी योजना में फंसे हैं। अब स्थानीय निवेशकों की नजर भी एसआईटी की सुनवाई और रकम वापसी की प्रक्रिया पर टिकी है।
सोमेंद्र कंकरायने ने अनाज का व्यापार शुरू किया। फिर रियल एस्टेट आजमाया। इस में सफलता मिली। इसी में उसने हैदराबाद की एक कंपनी माय होम में निवेश करना शुरू कर दिया। अपनी पुश्तैनी 11 एकड़ जमीन बेच दी और सारा पैसा उसी कंपनी लगा दिया। इससे उसको फायदा हुआ। फिर उसने अपने रिश्तेदारों का पैसा डबल किया, फिर भरोसा पैदा हुआ, तो लोग जुड़ते गए। ऐसे में साल 2017 में शुरू हुआ स्कैम 2019 में 70 करोड़ रुपए से भी ज्यादा में पहुंच गया।
बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह तमाम धार्मिक स्थलों पर घूमता रहा। इधर पुलिस ने उसकी करोड़ों रुपए की संपत्तियां सीज कर दी थीं और जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। जांच के दौरान पुलिस ने रणनीति के तहत एक जमीन की रजिस्ट्री की अनुमति दी, जिसके बाद आरोपी और उसके साथियों ने टेलीग्राम ऐप के जरिए बातचीत और लेन-देन शुरू किया। यही पुलिस के लिए सबसे अहम सुराग साबित हुआ।
डबल मनी मास्टरमाइंड सोमेंद्र कंकरायने खुद ही 12वीं पास और कॉलेज ड्रॉप आउट था। लेकिन खुद को हॉर्वर्ड से एमबीए बताता था। वह लग्जरी गाड़ियों का शौकीन भी था। साथ ही सेलिब्रिटिज से भी मुलाकात की खबरें फैलाता था। वह कहता था कि आपके पैसे में विदेशों में प्रॉपर्टी में निवेश करता हूं। वह लोगों में अपना भरोसा बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर फॉरेन ट्रिप्स का दावा करता था, लेकिन सच्चाई ये है कि उसके पास पासपोर्ट तक नहीं है।