"सौहार्द, सहमति और सामाजिक समरसता की ओर एक सशक्त कदम: कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ"

छग

Update: 2026-07-25 13:06 GMT
Durg. दुर्ग। "संवाद से समाधान, मध्यस्थता से सम्मान और सौहार्द से सशक्त समाज का निर्माण" के मूल उद्देश्य को साकार करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर तथा माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के प्रेरणादायी नेतृत्व में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली द्वारा जारी "Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India" स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP), 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा दिनांक 25 जुलाई 2026 से 29 जुलाई 2026 तक आयोजित पांच दिवसीय कम्यूनिटी मीडियेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग (छत्तीसगढ़) के चतुर्थ तल स्थित नवीन सभागार में आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह के साथ किया गया। कम्यूनिटी मीडियेशन अर्थात् सामुदायिक मध्यस्थता ग्रामीण भारत में सामाजिक समरसता, आपसी सौहार्द एवं वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं जनहितकारी पहल है।

इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले सामाजिक, पारिवारिक, पड़ोसी, भूमि एवं अन्य सामुदायिक विवादों का न्यायालयों तक पहुंचने से पूर्व ही आपसी संवाद, सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में शांतिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने बताया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा "वाद-मुक्त ग्रामीण भारत" के निर्माण के संकल्प के साथ जिले के पांच ग्राम घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम एवं कुथरेल का चयन किया गया है। इन ग्रामों से चयनित कुल 15 कम्यूनिटी मीडियेटर्स इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे हैं, जिन्हें Potential Trainers द्वारा कम्यूनिटी मीडियेशन की संपूर्ण प्रक्रिया, उसके व्यावहारिक पक्षों एवं विवाद समाधान के कौशलों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात् ये कम्यूनिटी मीडियेटर्स अपने-अपने ग्रामों में संवाद एवं मध्यस्थता की संस्कृति को सुदृढ़ करते हुए छोटे-छोटे विवादों का सौहार्दपूर्ण एवं प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे।

उपरोक्त कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संचालन एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एक समर्पित समन्वय समिति का गठन भी किया गया है, जिसमें स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत की अध्यक्षा सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ श्रेणी) मुस्कान शर्मा एवं पंकज शर्मा सम्मिलित हैं। यह समिति प्रशिक्षण कार्यक्रम की समस्त गतिविधियों के सुचारू संचालन, समन्वय एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निरंतर मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। इस महत्वाकांक्षी एवं जनकल्याणकारी पहल के सफल आयोजन में जिला अधिवक्ता संघ, दुर्ग का भी बहुमूल्य एवं सराहनीय योगदान रहा है।

अधिवक्ता संघ द्वारा प्रदान किया जा रहा सक्रिय सहयोग कम्यूनिटी मीडियेशन को जन-जन तक पहुंचाने तथा न्याय तक सरल एवं सुलभ पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। उल्लेखनीय है कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा इस महत्वाकांक्षी पहल को सफल बनाने हेतु मल्टी सेक्टोरियल एप्रोच (Multi-Sectoral Approach) को अपनाया गया है। इसके अंतर्गत राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पशु चिकित्सा विभाग सहित अन्य विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जिला दुर्ग स्थित विधि महाविद्यालयों सुराना लाॅ काॅलेज, भारती लाॅ काॅलेज, कल्याण लाॅ काॅलेज एवं शंकराचार्य लाॅ काॅलेज के प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण का सक्रिय सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पैरालीगल वालंटियर्स (PLVs), स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता भी इस अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगी।
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