स्वामित्व योजना में नाम दर्ज करने के नाम पर वसूली का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

छग

Update: 2026-07-20 17:47 GMT
Bemetara. बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत नाम दर्ज करने के एवज में रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने एक महिला पटवारी पर नाम दर्ज करने के लिए 20 से 25 हजार रुपए तक की मांग करने का आरोप लगाया है। परेशान ग्रामीणों ने मामले की शिकायत कलेक्टर से करते हुए कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के उद्देश्य से स्वामित्व योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत गांवों में आबादी क्षेत्र का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के बाद जिन लोगों का कब्जा दर्ज होगा, उन्हें डिजिटल दस्तावेज के माध्यम से भूमि का अधिकार प्राप्त होगा।
इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन संबंधी रिकॉर्ड तैयार करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को दी गई है। हल्का पटवारी द्वारा ग्रामीणों के नाम डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने हैं। लेकिन बेमेतरा जिले में इसी प्रक्रिया के दौरान ग्रामीणों ने वसूली का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित महिला पटवारी द्वारा स्वामित्व योजना में नाम दर्ज करने के लिए प्रति व्यक्ति 5 हजार रुपए की मांग की जा रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि एक परिवार में चार सदस्यों के नाम दर्ज होने हैं तो उनसे 20 से 25 हजार रुपए तक की राशि मांगी जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि रुपए नहीं देने पर नाम दर्ज नहीं करने की बात कही जा रही है। इससे कई परिवार परेशान हैं और उन्हें डर है कि कहीं उनका नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाएगा। इसी समस्या को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि स्वामित्व योजना आम लोगों को अधिकार देने के लिए शुरू की गई है, लेकिन यदि इसमें भ्रष्टाचार होगा तो जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। बेमेतरा कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने बताया कि शिकायत के आधार पर तहसीलदार द्वारा जांच टीम गठित कर दी गई है। जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके आवासीय भूमि का कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना है। इसके तहत ड्रोन सर्वे और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में जमीन विवाद कम हो सकें और ग्रामीणों को बैंक ऋण सहित अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। फिलहाल ग्रामीणों की शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है।
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