रायपुर। राजधानी रायपुर में ट्रैफिक पुलिस के एक जवान ने समय रहते घायल व्यक्ति की मदद कर मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है। यातायात पुलिस में पदस्थ जवान घनश्याम देवांगन ने अमलीडीह एक्सप्रेसवे ब्रिज के पास सड़क दुर्घटना में घायल होकर पड़े एक व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जानकारी के अनुसार, ट्रैफिक जवान घनश्याम देवांगन नियमित यातायात पेट्रोलिंग पर थे। इसी दौरान अमलीडीह एक्सप्रेसवे ब्रिज के समीप एक सड़क हादसा होने की सूचना मिली। मौके पर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में सड़क पर पड़ा हुआ है और तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है। बिना समय गंवाए उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से घायल को सुरक्षित वाहन में बैठाया और तुरंत वी केयर हॉस्पिटल पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने के बाद घनश्याम देवांगन ने केवल घायल को भर्ती कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी, बल्कि उसके परिजनों का पता लगाने का भी प्रयास किया। उपलब्ध जानकारी के आधार पर उन्होंने घायल के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें अस्पताल बुलाया, ताकि समय पर इलाज के साथ-साथ आवश्यक औपचारिकताएं भी पूरी की जा सकें।

चिकित्सकों के अनुसार, यदि घायल को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता तो उसकी स्थिति और गंभीर हो सकती थी। ट्रैफिक जवान की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण घायल को समय पर उपचार मिल सका। घटना के बाद अस्पताल पहुंचे परिजनों ने घनश्याम देवांगन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी त्वरित कार्रवाई ने उनके अपने की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई।

राजधानी में अक्सर ट्रैफिक पुलिस को केवल यातायात व्यवस्था संभालते हुए देखा जाता है, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी पूरी संवेदनशीलता से निर्वहन करते हैं। सड़क दुर्घटनाओं में "गोल्डन आवर" यानी दुर्घटना के बाद का पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे समय में तत्काल चिकित्सा सहायता मिलना पीड़ित की जान बचाने में निर्णायक साबित होता है। ट्रैफिक जवान घनश्याम देवांगन की इस मानवीय पहल की स्थानीय नागरिकों ने भी सराहना की है। लोगों का कहना है कि यदि हर नागरिक और सरकारी कर्मचारी ऐसी संवेदनशीलता दिखाए, तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कई मौतों को रोका जा सकता है।

यह घटना न केवल ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी और तत्परता का उदाहरण है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है कि दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति की सहायता करना हर नागरिक का नैतिक और मानवीय कर्तव्य है। समय पर उठाया गया एक कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है, और ट्रैफिक जवान घनश्याम देवांगन ने अपने इस कार्य से यही संदेश दिया है।

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