छत्तीसगढ़ के 12 जिलों में 'अर्नब' का अलर्ट! कई जिलों में स्कूल बंद; 779 राहत शिविर तैयार
भारी बारिश और तेज हवा की चेतावनी
रायपुर : बंगाल की खाड़ी में उठे भीषण चक्रवाती तूफान 'अर्नब' को लेकर छत्तीसगढ़ में अलर्ट जारी किया गया है। तूफान के प्रभाव से प्रदेश के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में भारी बारिश, तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए राज्य सरकार ने 12 जिलों को अति संवेदनशील मानते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश में 1,769 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है और 779 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर और कोंडागांव सहित कई जिलों में 28 अक्टूबर को स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। वहीं, किसानों को अगले कुछ दिनों तक धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 27 अक्टूबर की रात के बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश तट के करीब पहुंच चुका था। इसके 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश और यानम तट के पास टकराने की संभावना जताई गई थी। इस दौरान तटीय क्षेत्र में हवा की अधिकतम निरंतर रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने का पूर्वानुमान था। यह रफ्तार तटीय क्षेत्र के लिए है, छत्तीसगढ़ के लिए नहीं।
छत्तीसगढ़ के इन 12 जिलों में भारी बारिश का खतरा
राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन कार्ययोजना के अनुसार, दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के 12 जिलों को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों में 27 और 28 अक्टूबर को भारी बारिश, तेज हवाओं और जलभराव जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
ये है अति संवेदनशील जिलें
सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव, बस्तर, कांकेर, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बालोद और रायपुर है। यह राज्य की तैयारियों के लिए चिह्नित संवेदनशील जिलों की सूची है। सभी स्थानों पर एक समान बारिश कम ज्यादा हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 अक्टूबर को दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ में बारिश का असर अधिक रहने की संभावना है। इसके बाद 29 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिम और उत्तरी जिलों में भी बारिश का प्रभाव बढ़ सकता है।
कई जिलों में स्कूलों की छुट्टी
चक्रवाती तूफान की चेतावनी के बाद विभिन्न जिलों के प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अवकाश घोषित किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दंतेवाड़ा, सुकमा, कोंडागांव, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव सहित कई जिलों में 28 अक्टूबर को स्कूल बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। नारायणपुर जिले में 28 और 29 अक्टूबर को अवकाश की जानकारी सामने आई है। अभिभावकों से अपील है कि वे अपने जिले के प्रशासन या विद्यालय की ओर से जारी आदेश की पुष्टि करें। सभी जिलों में अवकाश की अवधि एक जैसी नहीं है।
1,769 संवेदनशील गांवों की पहचान, 779 राहत शिविर तैयार
चक्रवात के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए राज्य सरकार ने राहत और बचाव की व्यापक कार्ययोजना बनाई है। इसके तहत 12 अति संवेदनशील जिलों में 763 बाढ़ प्रभावित गांवों और अन्य 21 जिलों में 1,006 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। कुल 1,769 संवेदनशील गांवों के लिए बचाव और राहत व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य की उपलब्ध आपदा प्रबंधन कार्ययोजना के अनुसार तैयारियों के आंकड़े। राज्य के 12 संवेदनशील जिलों में 341 और अन्य जिलों में 438 राहत शिविर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में प्राथमिकता दी जाएगी।
NDRF और SDRF की टीमें अलर्ट, हेलीकॉप्टर से भी होगा रेस्क्यू
आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए राज्य में SDRF की सात टीमों को तैयार रखा गया है। प्रत्येक टीम में 36 जवान शामिल हैं। इन टीमों की तैनाती रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग और अंबिकापुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में की जा रही है। इसके अलावा दुर्ग में NDRF की टीम मौजूद है और बस्तर संभाग के संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त टीमों की तैनाती की तैयारी की गई है। सरकार ने 828 प्रशिक्षित नगर सेना जवानों और 3,895 आपदा मित्रों की सेवाएं लेने की व्यवस्था भी की है। बाढ़ में फंसे लोगों को जरूरत के मुताबिक हेलीकॉप्टर से निकालने की तैयारी भी रखी गई है। रायपुर और बस्तर के हेलीकॉप्टर बेस से समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार की 26 अक्टूबर की आधिकारिक जानकारी में भी NDRF और SDRF टीमों को तैयार रखने तथा जिला नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए जाने की बात कही है।
किसानों को चेतावनी
चक्रवात अर्नब के संभावित असर को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की ओर से किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान और अन्य फसलों की कटाई रोकने की सलाह दी गई है। जिन किसानों की फसल पहले ही कट चुकी है, उन्हें उपज को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखने के लिए कहा गया है। खेतों में जलभराव रोकने के लिए पानी निकासी की व्यवस्था करने और तेज हवा से फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने के उपाय अपनाने की भी सलाह दी गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कटाई के समय लगातार बारिश होने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए स्थानीय मौसम के अनुसार सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।
अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयां तैयार रखने के निर्देश
राज्य सरकार ने आपदा की स्थिति में चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित न हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट किया है। अति संवेदनशील 12 जिलों के 12 जिला अस्पतालों, 65 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 215 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अन्य 21 जिलों के 21 जिला अस्पतालों, 153 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और 609 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी आपात स्थिति के लिए तैयार रखने को कहा गया है। पशुओं के उपचार और टीकाकरण के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है।
रायपुर में भी बदलेगा मौसम
राजधानी रायपुर में भी चक्रवात का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बादल छाए रहने, गरज-चमक के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। दिए गए मौसम विवरण के अनुसार, 27 अक्टूबर के लिए रायपुर का अधिकतम तापमान करीब 31 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान था। इससे पहले 26 अक्टूबर को रायपुर में अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं, अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री सेल्सियस रहा।
24 घंटे चालू रहेगा कंट्रोल रूम
राज्य आपदा नियंत्रण हेल्पलाइन 1070
बाढ़, जलभराव या चक्रवात से जुड़ी आपात स्थिति में राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। राज्य स्तर पर बाढ़ नियंत्रण कक्ष को 24 घंटे सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। सभी जिलों के नियंत्रण कक्षों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। इंद्रावती, शबरी और गोदावरी नदियों के जलस्तर की निगरानी करने तथा प्रमुख बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में समय रहते प्रशासन को सूचना देने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
तूफान के दौरान इन सावधानियों का रखें ध्यान
तेज बारिश और बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदानों तथा पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
नदी, नाले और पानी में डूबी सड़कों को पार करने का प्रयास न करें।
बिजली के खंभों, टूटे तारों और कमजोर निर्माणों से दूर रहें।
मोबाइल फोन चार्ज रखें और प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान दें।
बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें।