डिजिटल अरेस्ट और खाता ब्लॉक के नाम पर ठगी से रहें सावधान

छग

Update: 2026-07-25 15:44 GMT
Sarangarh-Bilaigarh. सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए लोगों को डिजिटल ठगी से बचाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को डराकर और जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में आया तरीका "डिजिटल अरेस्ट" है, जिसमें ठग पुलिस, आरबीआई, सीबीआई, इनकम टैक्स विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं।
साइबर विशेषज्ञों और प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई वास्तविक कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है। कोई भी सरकारी एजेंसी किसी व्यक्ति को ऑडियो कॉल, वीडियो कॉल या मोबाइल मैसेज के माध्यम से गिरफ्तार नहीं करती। ऐसे मामलों में ठग फर्जी पहचान बनाकर लोगों से निजी जानकारी, बैंक विवरण और पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं। ठग अक्सर लोगों को यह कहकर डराते हैं कि उनके नाम से कोई अपराध हुआ है या उनके बैंक खाते में संदिग्ध गतिविधि मिली है। इसके बाद वे खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी का कर्मचारी या बैंक अधिकारी बताकर कार्रवाई का डर दिखाते हैं। कई बार पीड़ित व्यक्ति डर के कारण ठगों की बातों में आ जाता है और अपनी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर देता है।
इसी तरह साइबर अपराध का एक और तरीका सामने आया है, जिसमें लोगों को संदेश भेजकर कहा जाता है कि उनका बैंक खाता दो घंटे में ब्लॉक कर दिया जाएगा। ऐसे मैसेज में केवाईसी अपडेट करने के लिए एक लिंक दिया जाता है। ठग दावा करते हैं कि लिंक पर क्लिक कर जानकारी अपडेट नहीं करने पर बैंक खाता बंद हो जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी संदेश या कॉल पर घबराने की जरूरत नहीं है। बैंक कभी भी केवाईसी अपडेट करने के लिए किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने को नहीं कहते हैं। यदि बैंक खाते से जुड़ी कोई समस्या है तो ग्राहक को सीधे अपनी बैंक शाखा में जाकर जानकारी लेनी चाहिए।
भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से भी ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है। आरबीआई के अनुसार ग्राहक अपनी निजी जानकारी जैसे ओटीपी, एटीएम पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ठगी का सामना करना पड़ता है तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा साइबर अपराध की शिकायत वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज कराई जा सकती है।
साइबर ठगी से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अचानक आए संदेश या कॉल पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें। ठग अक्सर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर लोगों को फंसाते हैं। इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले जानकारी की पुष्टि जरूर करें। लोगों को सलाह दी गई है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, संदिग्ध एप डाउनलोड न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखें। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी या सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करता है तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना कोई कदम न उठाएं।
बैंक खाते को सक्रिय रखने या केवाईसी अपडेट करने के लिए ग्राहक अपनी बैंक शाखा या अधिकृत शिविर में जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट जैसे पहचान दस्तावेज साथ ले जा सकते हैं। यदि नाम और पते में कोई बदलाव नहीं है तो कई मामलों में स्वयं घोषणा के माध्यम से भी केवाईसी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। साइबर अपराधों से बचाव के लिए सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और संबंधित विभाग को दें, ताकि साइबर अपराधियों पर कार्रवाई की जा सके।
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