Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इंसान और वन्यजीवों के बीच प्रेम और अपनत्व की अनोखी मिसाल सामने आई है। करतला वन परिक्षेत्र के ग्राम साजापानी के जंगल में एक नन्हे हाथी के जन्म से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। गांव वालों ने इस नन्हे मेहमान का स्वागत परिवार के नवजात बच्चे की तरह करने का निर्णय लिया है। आगामी 25 अक्टूबर, रविवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हाथी के बच्चे की छट्टी मनाई जाएगी। इस आयोजन के लिए आसपास के सात गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया है। ग्रामीणों ने बाकायदा निमंत्रण पत्र भी छपवाए हैं।

20 अक्टूबर को हथिनी ने दिया था बच्चे को जन्म
जानकारी के अनुसार, कोरबा वनमंडल के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत लबेद बीट के साजापानी जंगल में 20 अक्टूबर की सुबह करीब छह बजे एक हथिनी ने शावक को जन्म दिया था। गश्त के दौरान वन विभाग के कर्मचारियों को हाथियों के झुंड में नवजात शावक दिखाई दिया। इसके बाद वन विभाग ने मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी। नन्हे हाथी के जन्म की खबर आसपास के गांवों में पहुंचते ही ग्रामीणों में खुशी फैल गई।

इंसानों की तरह मनाई जाएगी नन्हे हाथी की छट्टी
ग्राम साजापानी के ग्रामीणों ने आपसी सहमति से तय किया है कि हाथी के बच्चे की छट्टी उसी तरह मनाई जाएगी, जैसे किसी परिवार में नवजात शिशु के जन्म के बाद पारंपरिक उत्सव मनाया जाता है। इस अवसर पर विशेष पूजा और सामूहिक आयोजन की तैयारी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के साथ उनका पुराना रिश्ता है और इस नन्हे मेहमान का जन्म उनके लिए खुशी का अवसर है।

सात गांवों को भेजा गया विशेष निमंत्रण
आयोजन में साजापानी के अलावा जामपानी, पहाड़गांव, रामभांठा, लबेद, घुईचुआ और काशीपानी के ग्रामीणों को शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मां कांशीरानी नवयुवक सेवा समिति आयोजन की तैयारियों में जुटी है। गांव में पारंपरिक तरीके से 'झारा-झारा नेवता' देकर लोगों को निमंत्रण दिया जा रहा है। इसके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी निमंत्रण भेजा गया है।

ग्रामीणों के सहयोग से होगा भंडारा
छट्टी कार्यक्रम को खास बनाने के लिए ग्रामीण अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग और चावल एकत्र कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि लोग पांच से बीस रुपये तक सहयोग राशि दे रहे हैं। आयोजन के दौरान सामूहिक भंडारे की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें दाल, चावल और सब्जी परोसी जाएगी। ग्रामीणों की इस पहल को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और सामुदायिक सहभागिता के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

ड्रोन से हो रही मां और बच्चे की निगरानी
नन्हे हाथी के जन्म के बाद वन विभाग भी सतर्क है। वन अमला ड्रोन कैमरों की मदद से हथिनी और उसके बच्चे की गतिविधियों पर नजर रख रहा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के करीब न जाएं। नवजात शावक की सुरक्षा को लेकर हथिनी अधिक संवेदनशील हो सकती है। ऐसे में भीड़ जुटाना या नजदीक जाकर तस्वीरें लेना खतरनाक हो सकता है।

मानव और हाथियों के सह-अस्तित्व का संदेश
साजापानी के ग्रामीणों की यह पहल प्रकृति और इंसान के बीच सकारात्मक रिश्ते का संदेश दे रही है। जहां कई क्षेत्रों में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सामने आती हैं, वहीं यहां ग्रामीण नन्हे हाथी के जन्म को उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, समारोह के दौरान हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी होगा। ग्रामीणों का यह अनूठा आयोजन अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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