Durg. दुर्ग। जिले में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को मजबूत करने, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और पुलिस विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री विजय अग्रवाल ने राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों की क्राइम मीटिंग ली। बैठक में अपराध की वर्तमान स्थिति से लेकर लंबित प्रकरण, डिजिटल विवेचना, साइबर अपराध, नशे के अवैध कारोबार, फरार आरोपियों, लंबित वारंट और आगामी त्योहारी आयोजनों के दौरान कानून-व्यवस्था की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में नवीन आपराधिक कानूनों के तहत ई-साक्ष्य, मेडलीपार, ई-FSL और डिजिटल विवेचना की निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, मोबाइल फोन, CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल उपकरणों से प्राप्त साक्ष्यों को नियमानुसार सुरक्षित रखा जाए और संबंधित प्रकरण से लिंक किया जाए, ताकि विवेचना साक्ष्य आधारित और प्रभावी बन सके। ई-FSL से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए साक्ष्यों को समय पर फॉरेंसिक साइंस लैब भेजने तथा आवश्यक दस्तावेज और जानकारी सही तरीके से संधारित करने के निर्देश दिए गए। FSL से प्राप्त रिपोर्ट को संबंधित केस से जोड़कर डिजिटल रिकॉर्ड को अपडेट रखने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में CCTNS की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को FIR से F-5 तक सभी आवश्यक डेटा एंट्री शुद्धता और निर्धारित समयसीमा में पूरी करने के निर्देश दिए गए। केस डायरी और अन्य दस्तावेजों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड में एकरूपता बनाए रखने तथा रिकॉर्ड को विवेचना की वर्तमान स्थिति के अनुसार अपडेट करने को कहा गया। लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए एसएसपी ने 60 और 90 दिवस की वैधानिक समय-सीमा के भीतर विवेचना पूरी कर चालान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वर्ष 2024 और 2025 से लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। इसके अलावा बैंक संबंधी कार्रवाई, MLC, PMR, FSL रिपोर्ट और अन्य लंबित कार्यवाहियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
अपराध नियंत्रण को लेकर फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, लंबित वारंटों की तामीली और गुंडा-बदमाशों तथा आदतन अपराधियों के खिलाफ नियमानुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने पर जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों से अपराधियों के मॉडस ऑपरेंडी का विश्लेषण कर तकनीकी और वैज्ञानिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने को कहा गया। साइबर अपराधों को लेकर भी बैठक में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। बैंकिंग ट्रांजेक्शन, डिजिटल फुटप्रिंट, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण कर आरोपियों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने के निर्देश दिए गए। साइबर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का शीघ्र निराकरण करने तथा साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी जांच को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर एसएसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्रवाई केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पुलिस को मादक पदार्थों की सप्लाई चेन, स्रोत, परिवहन, वितरण नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी जुटाकर पूरे नेटवर्क के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करने को कहा गया। नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतने और अपराध की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परिवार, अभिभावक, स्कूल तथा संबंधित विभागों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए। बाल हित और कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
आगामी त्योहारी आयोजनों को देखते हुए थाना स्तर पर पहले से पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। बाजार क्षेत्रों में दुकानों को निर्धारित सफेद पट्टी के पीछे लगवाने, मुख्य मार्गों को बाधित किए बिना गणेश पंडाल और अन्य सार्वजनिक आयोजन निर्धारित स्थानों पर कराने तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर बैठे मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए संबंधित विभागों से समन्वय करने और यातायात प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने को भी कहा गया।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग, नगर पुलिस अधीक्षक छावनी, नगर पुलिस अधीक्षक भिलाई नगर, डीएसपी लाइन, डीएसपी हेडक्वार्टर, डीएसपी महिला सेल सहित जिले के सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे। एसएसपी विजय अग्रवाल ने थाना प्रभारियों को अपराध की प्रवृत्ति का नियमित विश्लेषण करने, लंबित मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा करने और नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप वैज्ञानिक विवेचना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति रोकने, अपराधियों पर सतत निगरानी रखने, तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और संवेदनशील वर्गों की सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।