Raipur. रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की महत्वपूर्ण गोंदिया–जबलपुर रेलखंड दोहरीकरण परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। करीब 5,235.79 करोड़ रुपये की लागत से 231 किलोमीटर लंबी रेललाइन का दोहरीकरण किया जाएगा। मार्च 2026 में स्वीकृत इस परियोजना का पूरे मार्ग का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। परियोजना के पूरा होने से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। इसके साथ ही उत्तर और दक्षिण भारत के बीच यात्रियों और मालगाड़ियों का परिचालन अधिक सुगम हो सकेगा। रेलवे के अनुसार, इस परियोजना से रेल यातायात की क्षमता बढ़ने के साथ औद्योगिक गतिविधियों, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।
तीन रेलखंडों में होगा दोहरीकरण, 23 स्टेशन शामिल
गोंदिया–जबलपुर दोहरीकरण परियोजना को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। इसमें गोंदिया–बालाघाट का 42 किलोमीटर, बालाघाट–नैनपुर का 82.40 किलोमीटर और नैनपुर–जबलपुर का 106.80 किलोमीटर रेलखंड शामिल है। परियोजना का लगभग 213 किलोमीटर हिस्सा मध्यप्रदेश और 18 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में स्थित है। इस मार्ग पर कुल 23 स्टेशन हैं। इनमें गोंदिया, प्रतापबाग, बिरसोला, हट्टा रोड, बालाघाट, धापेवाड़ा, समनापुर, चारेगांव, लामटा, नगरवाड़ा, पाद्रीगंज, नैनपुर, पिंडरई, निधानी, घंसौर, बिनैकी, शिकारा, सुकरीमंगेला, बरगी, चारघाट पिपरिया, ग्वारीघाट, गढ़ा और कछपुरा शामिल हैं।
507 पुलों का निर्माण प्रस्तावित, 10 नए स्टेशन भवन बनेंगे
रेलवे के अनुसार, परियोजना के तहत पूरे मार्ग का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। कुल 507 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से लगभग सभी के सामान्य व्यवस्था आरेख तैयार हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त 23 में से 21 स्टेशनों के यार्ड प्लान तैयार किए जा चुके हैं। शेष स्टेशनों के लिए भी प्रक्रिया जारी है। परियोजना के तहत 10 नए स्टेशन भवन बनाए जाएंगे। वहीं, 31 स्थानों पर बिजली, पानी और अन्य उपयोगिता सेवाओं को स्थानांतरित किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण, सरकारी जमीन हस्तांतरण और वन्यजीव संबंधी स्वीकृतियों की प्रक्रिया भी अलग-अलग चरणों में चल रही है।
उत्तर से दक्षिण भारत का रेल सफर होगा आसान
गोंदिया–जबलपुर रेलखंड उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रेल मार्ग है। यह गोंदिया में हावड़ा–मुंबई रेलमार्ग तथा जबलपुर में इटारसी–वाराणसी रेलमार्ग से जुड़ता है। रेलवे के अनुसार, यह मार्ग वाराणसी और प्रयागराज से चेन्नई, बेंगलुरु तथा हैदराबाद तक पहुंचने वाले सबसे छोटे रेल मार्गों में महत्वपूर्ण है। दोहरीकरण के बाद इस मार्ग पर अधिक यात्री और मालगाड़ियां चलाई जा सकेंगी। ट्रेनों की समयबद्धता और परिचालन क्षमता में भी सुधार होने की उम्मीद है।
हर साल 350 करोड़ की बचत, लाखों लोगों को रोजगार
परियोजना पूरी होने पर प्रतिवर्ष लगभग 7.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी। रेलवे का अनुमान है कि इससे सालाना करीब 350 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत बचाई जा सकेगी। इसके साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में प्रतिवर्ष लगभग 16 करोड़ किलोग्राम की कमी आने की संभावना है। रेलवे ने इसे लगभग 63 लाख पेड़ लगाने के बराबर बताया है। परियोजना के निर्माण के दौरान करीब 78 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित होने का अनुमान है। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अंडरपास और फेंसिंग का भी प्रावधान किया गया है।
पर्यटन और उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस परियोजना से बालाघाट, सिवनी, मंडला, जबलपुर और गोंदिया सहित आसपास के क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान, पेंच टाइगर रिजर्व और धुआंधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकेगी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शेख समी उर रहमान ने बताया कि यह परियोजना रेल बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे यात्रियों, किसानों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को लाभ मिलेगा। रेलवे परियोजना को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
Tags: