Dhamtari. धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध के डुबान क्षेत्र से प्रभावित परिवारों ने अपनी लंबित पुनर्वास की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन शुरू कर दिया है। शासन तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए करीब 100 प्रभावित लोग बांध के पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलन के तीसरे दिन नौ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार पानी में खड़े रहने के कारण प्रदर्शनकारियों को थकान, कमजोरी और पैरों में संक्रमण की शिकायत हुई है। इसके बावजूद प्रभावित परिवार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, गंगरेल बांध के निर्माण के समय बड़ी संख्या में गांव डुबान क्षेत्र में आ गए थे। इसके चलते हजारों परिवारों को अपनी जमीन और घर छोड़ने पड़े थे। प्रभावित परिवारों का कहना है कि बांध निर्माण के बाद उन्हें मुआवजा तो दिया गया, लेकिन सभी परिवारों को समान रूप से पुनर्वास का लाभ नहीं मिल सका। इसी मांग को लेकर प्रभावित परिवार लंबे समय से शासन और प्रशासन के सामने अपनी बात रखते आ रहे हैं। इस बार डुबान प्रभावितों ने अपनी मांगों को लेकर जल सत्याग्रह का रास्ता अपनाया है। करीब 100 लोग दिनभर बांध के पानी में खड़े होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें वर्षों से पुनर्वास की सुविधा मिलने का इंतजार है, लेकिन अब तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है।
आंदोलन के तीसरे दिन प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ना शुरू हो गया। लगातार पानी में खड़े रहने के कारण नौ लोगों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें थकान, कमजोरी और पैरों में संक्रमण जैसी परेशानियां होने लगीं। इसके बाद सभी नौ प्रभावितों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंगरेल बांध के निर्माण के दौरान कुल 52 गांव डुबान क्षेत्र में आए थे। इन गांवों में रहने वाले लगभग 8,700 परिवारों को मुआवजा देकर विस्थापित किया गया था। हालांकि, प्रभावित परिवारों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों को पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई।
छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जोगीडीह नाम का गांव बसाया गया था। यहां 109 परिवारों को बसाया गया, लेकिन बाकी प्रभावित परिवारों को इसी तरह पुनर्वास का लाभ नहीं मिल सका। इसके बाद पुनर्वास से वंचित परिवारों ने समान अधिकार की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंचा। प्रभावितों के अनुसार, करीब छह साल पहले हाईकोर्ट ने सभी पात्र प्रभावित परिवारों को समान रूप से पुनर्वास का लाभ देने का आदेश राज्य सरकार को दिया था।
आंदोलनकारियों का कहना है कि अदालत का आदेश आने के बावजूद अब तक उन्हें पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है। इसी कारण प्रभावित परिवारों को बार-बार आंदोलन करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि वर्षों से मांग उठाने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बाद भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। गंगरेल बांध प्रभावितों का यह पहला आंदोलन नहीं है। इससे पहले भी परिवार पुनर्वास की मांग को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। इस बार उन्होंने जल सत्याग्रह के माध्यम से अपनी मांग शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया है। लगातार पानी में खड़े रहने से प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभाव ने भी चिंता बढ़ा दी है। नौ लोगों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद आंदोलन से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां सामने आई हैं। फिलहाल प्रभावित परिवार समान पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप सभी पात्र प्रभावितों को पुनर्वास का लाभ दिया जाए। अब इस मामले में शासन और प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई होती है, इस पर आंदोलनकारियों की नजर बनी हुई है।
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