कम वर्षा में बेहतर उत्पादन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की वैज्ञानिक सलाह
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Sukma. सुकमा। जिले में अनियमित एवं कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा द्वारा किसानों को समय पर वैज्ञानिक कृषि परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप समूह, ग्राम स्तरीय बैठकों एवं कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को मौसम आधारित कृषि तकनीकों, जल संरक्षण एवं फसल प्रबंधन की जानकारी निरंतर दी जा रही है, ताकि प्रतिकूल मौसम के प्रभाव को कम करते हुए किसानों की फसल, उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सके।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेतों में मेड़बंदी कर वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करने तथा शेष धान रोपाई को उपलब्ध नमी का उपयोग करते हुए शीघ्र पूरा करने की सलाह दी है। विलंबित वर्षा की स्थिति में कम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ ऊपरी एवं कम पानी वाले क्षेत्रों में मक्का, रागी, कुटकी, उड़द, कुल्थी एवं तिल जैसी कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों की खेती करने का सुझाव दिया गया है। सूखे के जोखिम को कम करने के लिए मक्का के साथ अरहर की अंतरवर्ती खेती, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग, समय पर खरपतवार नियंत्रण, मल्चिंग तथा समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
प्रशासन द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती, सब्जी उत्पादन, पशुपालन एवं मत्स्य पालन में भी वैज्ञानिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्राकृतिक खेती में जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत एवं जैविक आदानों के उपयोग, सब्जियों के लिए उठी हुई क्यारियों एवं उचित जल निकासी, पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल और समय पर टीकाकरण तथा मत्स्य पालन में जलस्तर एवं जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की सलाह दी गई है। इन उपायों का उद्देश्य मौसम की चुनौती के बीच कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को अधिक टिकाऊ बनाना और किसानों की उत्पादन लागत कम करते हुए उनकी आय को सुरक्षित रखना है।
कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा ने किसानों से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन संबंधी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है। प्राकृतिक आपदाओं एवं मौसम संबंधी जोखिमों से फसल की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत समय पर फसल बीमा कराने पर भी जोर दिया गया है। साथ ही किसानों से कृषि परामर्श सेवाओं, व्हाट्सएप समूह एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़कर समय-समय पर जारी वैज्ञानिक सलाह का पालन करने की अपील की गई है, ताकि प्रशासन एवं कृषि विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से कम वर्षा की चुनौती के बावजूद जिले में अधिक उत्पादन, कम लागत और बेहतर आय सुनिश्चित की जा सके।