Korba. कोरबा। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री तेजी से बढ़ने लगी है। लोग त्योहार के दौरान मिलावट से बचने के लिए स्थानीय उत्पादों के बजाय नामी कंपनियों के पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर अधिक भरोसा करते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से सामने आए खाद्य विभाग के जांच परिणामों ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। जिले में पिछले 10 महीनों के दौरान लिए गए 120 खाद्य पदार्थों के नमूनों में से 20 गुणवत्ता जांच में फेल पाए गए हैं। इनमें पतंजलि के शुद्ध देसी घी और हल्दीराम के रसगुल्ले तथा चना जैसे उत्पादों के नमूने भी शामिल बताए गए हैं। हालांकि, संबंधित नमूनों का अमानक मिलना इन ब्रांडों के सभी उत्पादों के खराब होने का प्रमाण नहीं है।

जानकारी के मुताबिक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लगातार जांच अभियान चला रहा है। इस अभियान के तहत मिठाई दुकानों, किराना प्रतिष्ठानों, रेस्टोरेंट और डेयरियों से खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। इन नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है, जहां निर्धारित गुणवत्ता मानकों के आधार पर परीक्षण किया जाता है। विभागीय जानकारी के अनुसार, पिछले 10 महीनों में कुल 120 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें से 20 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस प्रकार करीब 16.7 प्रतिशत नमूने अमानक पाए गए हैं। जांच में नामी ब्रांडों से जुड़े उत्पादों के नमूने फेल होने की जानकारी भी सामने आई है। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। त्योहारी सीजन में आमतौर पर घी, दूध, पनीर, मिठाई और अन्य खाद्य सामग्रियों की मांग बढ़ जाती है।

कई उपभोक्ता गुणवत्ता की गारंटी समझकर बड़े ब्रांडों के उत्पाद खरीदना पसंद करते हैं। ऐसे में जांच में संबंधित नमूनों के फेल होने से खाद्य सुरक्षा को लेकर सतर्कता की आवश्यकता बढ़ गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी विजय भारत ने बताया कि मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे फूड पॉइजनिंग सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अलग-अलग प्रकार के उल्लंघनों के लिए आर्थिक दंड और गंभीर मामलों में कारावास तक का प्रावधान है। अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर सजा निर्धारित होती है। इधर, दीपावली को देखते हुए जिला प्रशासन ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच और सख्त कर दी है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार को जिले की चार दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों पर कुल 13 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

निरीक्षण के दौरान विभागीय टीम ने विभिन्न खाद्य सामग्रियों के नमूने भी एकत्र किए हैं। इन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद यदि गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया गया है कि खाद्य विभाग की ओर से जिले के कई रेस्टोरेंट और डेयरियों के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों के उल्लंघन पर इन प्रतिष्ठानों पर लाखों रुपये का जुर्माना लगाए जाने की जानकारी है। विभाग का उद्देश्य
त्योहारी सीजन
में मिलावटी और अमानक खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाना तथा आम नागरिकों को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है। ऐसे में उपभोक्ताओं को भी मिठाइयां और पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट, पैकेजिंग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी की जांच करने की सलाह दी जा रही है। फिलहाल खाद्य विभाग का निरीक्षण अभियान जारी है। आने वाले दिनों में अन्य प्रतिष्ठानों से भी नमूने लिए जा सकते हैं। विभाग की कार्रवाई से स्पष्ट है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के मामले में स्थानीय दुकानों के साथ नामी ब्रांडों के उत्पाद भी जांच के दायरे में हैं।
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