रायपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाला मामले में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने की जानकारी सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) से जुड़े शराब घोटाला प्रकरण में उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। हालांकि, जमानत मिलने के बावजूद रामगोपाल अग्रवाल फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे। उनके खिलाफ अन्य प्रकरणों में भी कानूनी कार्यवाही चल रही है और जमानत याचिकाओं पर फैसला आना बाकी है। जानकारी के मुताबिक, न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की अदालत ने शराब घोटाले से जुड़े ACB प्रकरण में अग्रवाल की जमानत मंजूर की है। इसे उनके लिए कानूनी राहत माना जा रहा है, लेकिन अन्य मामलों में आवश्यक जमानत आदेश नहीं होने के कारण उनकी रिहाई का रास्ता अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है।
एक मामले में जमानत, बाकी मामलों में राहत का इंतजार
रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ कथित शराब घोटाले के अलावा कोयला लेवी और चावल की कस्टम मिलिंग से जुड़े प्रकरणों में भी जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनकी ओर से ED के कोयला घोटाला, ED के शराब घोटाला और ACB के चावल घोटाला मामले में भी जमानत याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं पर संबंधित जांच एजेंसियों से जवाब मांगा गया है। अदालत में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।
दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
उपलब्ध विवरण के अनुसार, लंबित जमानत याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एन.के. व्यास और न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की अदालत में सुनवाई होनी है। अदालत ने संबंधित मामलों में ED और ACB से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई के लिए लगभग दो सप्ताह बाद का समय निर्धारित किए जाने की जानकारी है। ऐसे में अग्रवाल को फिलहाल दूसरी जमानत याचिकाओं के निपटारे का इंतजार करना होगा।
जमानत मिलने के बाद भी रिहाई क्यों नहीं?
किसी व्यक्ति के खिलाफ अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज होने की स्थिति में एक प्रकरण में जमानत मिलने का अर्थ सभी मामलों में स्वतः रिहाई नहीं होता। यदि किसी दूसरे मामले में न्यायिक हिरासत लागू है, तो संबंधित अदालत से आवश्यक राहत मिलने तक आरोपी को हिरासत में रहना पड़ सकता है। रामगोपाल अग्रवाल के मामले में भी यही कानूनी स्थिति सामने आई है। ACB के शराब घोटाला प्रकरण में राहत मिलने के बावजूद अन्य मामलों में जमानत संबंधी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।
पहले विशेष अदालत ने खारिज की थी जमानत
रामगोपाल अग्रवाल को इससे पहले कथित शराब और कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में अदालत से झटका लग चुका है। सितंबर 2026 में रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में उनकी जमानत याचिका खारिज की थी। इसके बाद उनकी ओर से उच्च न्यायालय में कानूनी राहत प्राप्त करने के प्रयास जारी रहे।
शराब और कोयला घोटाले की जांच से जुड़ा है मामला
छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच EOW-ACB और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत की जा रही है। जांच एजेंसियों ने विभिन्न आरोपियों की भूमिका, कथित वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह से संबंधित तथ्यों को लेकर जांच की है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का नाम भी इन जांचों में सामने आया था। हालांकि, उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम रूप से दोष सिद्ध होने का प्रश्न अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट से एक प्रकरण में जमानत मिलने की जानकारी के बाद अब निगाहें अन्य लंबित याचिकाओं पर हैं। आने वाली सुनवाई में जांच एजेंसियों के जवाब और दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल अग्रवाल की रिहाई के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उनकी जेल से रिहाई संबंधित सभी आवश्यक न्यायिक आदेशों और कानूनी औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी।
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