ऑपरेशन क्लीन हंट: 32 लाख की ट्रांसपोर्ट कंपनी से की धोखाधड़ी, फरार आरोपी गिरफ्तार
छग
Raigarh. रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में फरार अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत कोतवाली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ट्रांसपोर्ट कंपनी से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में चार महीने से फरार चल रहे आरोपी दीपक शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन पुलिस की सतर्क निगरानी और मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर उसे दरोगापारा क्षेत्र से दबोच लिया गया।
पुलिस के अनुसार यह मामला 24 मार्च 2026 का है, जब श्रीराम ट्रांसपोर्ट, ढिमरापुर चौक के संचालक कमल किशोर शाह ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी में कार्यरत कर्मचारी प्रकाश मिश्रा और दीपक शर्मा ट्रांसपोर्ट वाहनों के बिल और वाउचर तैयार कर भुगतान के लिए प्रस्तुत करते थे। नियमित भुगतान के दौरान एक ही क्रमांक के कई वाउचर मिलने पर संदेह हुआ, जिसके बाद कंपनी ने आंतरिक जांच कराई। जांच में सितंबर 2025 से लगातार फर्जी बिल-वाउचर तैयार कर कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का बड़ा खुलासा हुआ।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने एक ही वाउचर नंबर का उपयोग कर अलग-अलग वाहनों के नाम से डुप्लीकेट वाउचर तैयार किए और उनके आधार पर भुगतान प्राप्त किया। इस फर्जीवाड़े में संदीप बंसल, जासमिन बंजारा, नेहा चौहान, सूर्यकांत अग्रवाल, कमल बसोड़ और प्रियंका गुप्ता के बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों के माध्यम से कंपनी से लगभग 32 लाख रुपये धोखाधड़ी कर निकाले गए। शिकायत के आधार पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 187/2026 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई।
पुलिस ने जांच के दौरान बिल-वाउचरों में दर्ज वाहन नंबरों का सत्यापन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से कराया। सत्यापन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन वाहन नंबरों के आधार पर भुगतान लिया गया था, उनमें कई दोपहिया और निजी उपयोग के छोटे वाहन थे, जिनका ट्रांसपोर्ट कंपनी या माल परिवहन कार्य से कोई संबंध नहीं था। संबंधित वाहन मालिकों ने भी पुलिस को स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने कभी श्रीराम ट्रांसपोर्ट के लिए कोई परिवहन कार्य नहीं किया। इससे यह साबित हुआ कि पूरी योजना सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर कंपनी को ठगने के उद्देश्य से बनाई गई थी। मामले की जांच के दौरान मुख्य आरोपी दीपक शर्मा लगातार फरार था।
रायगढ़ पुलिस ने ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत उसकी तलाश तेज कर दी थी। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी अपने निवास क्षेत्र दरोगापारा में देखा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल दबिश देकर 29 जुलाई 2026 को उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में दीपक शर्मा ने स्वीकार किया कि उसने कंपनी के ऑपरेटर प्रकाश मिश्रा के साथ मिलकर फर्जी बिल और वाउचर तैयार किए थे। उसने बताया कि विभिन्न लोगों के बैंक खातों में भुगतान की राशि भेजी जाती थी, जहां से कमीशन काटकर बाकी रकम उसके और अन्य साथियों द्वारा बताए गए बैंक खातों, क्यूआर कोड और फोन-पे नंबरों पर ट्रांसफर कर दी जाती थी। आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी में से लगभग 15 लाख रुपये उसे मिले थे। इनमें से करीब 4 लाख रुपये उसने अपनी मां के इलाज में खर्च किए, जबकि शेष राशि व्यक्तिगत खर्च और घूमने-फिरने में खर्च कर दी।
पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। फरार आरोपी की गिरफ्तारी में उप निरीक्षक ऐनु देवांगन, प्रशिक्षु उप निरीक्षक हर्ष चंद्राकर, एएसआई कोसो सिंह, आरक्षक कमलेश यादव और आरक्षक कोमल तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने बताया कि मामले के अन्य आरोपियों की तलाश अभी जारी है और जल्द ही उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि रायगढ़ पुलिस ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत फरार अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और आम नागरिकों के विश्वास के साथ धोखाधड़ी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।