जगदलपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन कर देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। राष्ट्रपति ने श्रद्धापूर्वक देवी मां के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। राष्ट्रपति का यह दौरा बस्तर की धार्मिक आस्था, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति भवन ने भी अपने आधिकारिक कार्यक्रम में 23 अक्टूबर को जगदलपुर में मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा से जुड़े सार्वजनिक आयोजन में उनकी सहभागिता की जानकारी दी थी।
मां दंतेश्वरी के चरणों में राष्ट्रपति ने की पूजा-अर्चना
बस्तर प्रवास के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचीं। यहां मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। राष्ट्रपति ने देवी मां के समक्ष देशवासियों की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का पारंपरिक स्वागत किया गया। मां दंतेश्वरी मंदिर बस्तर अंचल की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां सालभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष रूप से बस्तर दशहरा के दौरान देवी मां की आराधना का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ जाता है। राष्ट्रपति का मंदिर पहुंचना बस्तर की इस प्राचीन परंपरा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर रहा।
राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी रहे उपस्थित
राष्ट्रपति के मंदिर दर्शन के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने भी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति के बस्तर आगमन को छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि मां दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की अटूट श्रद्धा है। देवी मां इस क्षेत्र के धार्मिक विश्वास और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के दर्शन-पूजन को बस्तर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से भी जोड़ा।
बस्तर की आस्था और संस्कृति का प्रमुख केंद्र है मां दंतेश्वरी मंदिर
मां दंतेश्वरी को बस्तर की आराध्य देवी माना जाता है। क्षेत्र के धार्मिक और सामाजिक जीवन में देवी मां की विशेष मान्यता है। बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक आयोजनों में मां दंतेश्वरी की पूजा का महत्वपूर्ण स्थान है। बस्तर दशहरा का आयोजन भी देवी मां की आराधना से गहराई से जुड़ा हुआ है। देश के दूसरे हिस्सों में दशहरा जहां मुख्य रूप से भगवान राम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में मनाया जाता है, वहीं बस्तर दशहरा की अपनी अलग धार्मिक और जनजातीय परंपराएं हैं। यहां देवी आराधना और सामुदायिक सहभागिता इस उत्सव की मुख्य विशेषताएं हैं।
राष्ट्रपति के आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा महत्व
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर अपनी अनूठी जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि बस्तर की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। यहां के जनजातीय समुदायों ने अपनी धार्मिक मान्यताओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को पीढ़ियों से संरक्षित रखा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर प्रवास से इन परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलने की उम्मीद है।
मुरिया दरबार में भी शामिल होने का कार्यक्रम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बस्तर दौरे में मां दंतेश्वरी मंदिर दर्शन के साथ ऐतिहासिक मुरिया दरबार का कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया था। इस आयोजन में बस्तर की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े मांझी, चालकी और जनजातीय प्रतिनिधियों की सहभागिता रहती है। मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इस मंच के माध्यम से स्थानीय समाज के प्रतिनिधि अपनी बात रखते हैं और क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हैं। राष्ट्रपति के आधिकारिक दौरा कार्यक्रम के अनुसार, उन्हें जगदलपुर में मुरिया दरबार और सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होना था।
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