वेयरहाउस में जांच को मैनेज कर रहीं प्रभारी अधिकारी
खुले बाजार में नष्टीकरण वाली शराब बेचने का मामला
15 दिन पहले उड़नदस्ते की प्रभारी बनाई गई, आज तक रिलीव नहीं
आबकारी विभाग और सरकार को कर रहे बदनाम
कमिश्नर कार्यालय से गई जांच टीम संदेह के दायरे में
जांच के नाम पर लीपापोती और भ्रष्ट अधिकारी को बचाने का प्रयास
चोर के हाथ में तिजोरी की चाबी, जांच का यही तरीका अपनाया जा रहा
पूरे प्रदेश में आबकारी अमले की हो रही किरकिरी, ओवर रेटिंग और मिलावटी शराब से हो रही सरकार की जग हंसाई और बदनामी
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को मामले को संज्ञान में लेकर भ्रष्ट आबकारी अधिकारी पर त्वरितकड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सरकार बदनामी से बचे
रायपुर (जसेरि)। राजधानी में सिलतरा वेयर हाउस से नष्टीकरण वाली शराब खुले बाजार में बिकने तथा पूरे प्रदेश में शराब की ओवररेटिंग के खुलासे के बाद भी आबकारी विभाग दोषियों को बचाने में जुटा है। सिलतरा वेयर हाउस से नष्टीकरण वाली शराब जिस प्रभारी अधिकारी दीप मसीह के संरक्षण में खुले बाजार में बेची गई उस अधिकारी को प्रमोट कर राज्य उड़नदस्ते का प्रभारी बना दिया गया। इसके बावजूद वह अधिकारी अभी तक रिलीव नहीं हुई हैं, इतना ही नहीं कमिश्नर ने वेयरहाउस में एक जांच के लिए एक टीम भेजी लेकिन जिस प्रभारी अधिकारी के संरक्षण में नष्टीकरण वाली शराब खुले बाजार में बेची गई उसी की मौजूदगी भला कौन कर्मचारी मुंह खोलता, जांच टीम औपचारिकता पूरी कर लौट आई। उक्त अधिकारी वेयरहाउस में बैठे-बैठे पूरी जांच को मैनेज करती रहीं। इससे पता चलता है कि आबकारी विभाग इस पूरे मामले को रफा-दफा करने में लगा हुआ है।
आबकारी विभाग ओवर रेटिंग शराब बिक्री के मामले में जहां छोटे अधिकारियों-कर्मचारियों को निशाना बनाकर कार्रवाई का दिखावा कर रहा है वहीं वहीं सिलतरा वेयर हाऊस से आऊट डेटिंग व नष्टीकरण वाली शराब खुले बाजार में बेचे जाने के मामले में कोई कार्रवाई से बच रहा है। दरअसल विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से मामला उठने के बावजूद सरकार व विभाग द्वारा मामले को संज्ञान में न लेना आश्चर्यजनक है। भ्रष्ट अधिकारियों ने नष्टीकरण के बजाय जहरीली शराब को आसपास के ढाबे और होटलों में बेच कर लाभ कमाया। यह सबकुछ प्रभारी अधिकारी के संरक्षण में वेयर हाउस के कर्मचारियों द्वारा किया गया। इतना ही नहीं प्रभारी अधिकारी को अब उपकृत कर राज्य आबकारी उडऩदस्ते का प्रभारी बना दिया गया है। इससे साफ है कि अपनी और विभाग के उच्चाधिकारियों की जेब भरने वाले अधिकारियों पर किसी तरह की कार्रवाई की उ मीद बेमानी है। ऐसे अधिकारियों का बेखौफ होना और किसी कार्रवाई को लेकर संशंकित न होना भी हैरान करने वाला है। ऐसे अधिकारी खुले तौर पर दावा करते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अधिकारियों की ऐसी कार्यप्रणाली से जनता और सरकार के प्रति उनकी जवाबदेही की पोल खोलती है। विभाग की नजर में भ्रष्ट अधिकारी प्रमोशन के हकदार बन गए हैं। इसका स्पष्ट संकेत यह है कि पूर्व में इन्हीं आरोपों में हटाए गए 29 अधिकारी कर्मचारियों को फिर से बहाल करने की तैयारी अंदरखाने चल रही है। वहीं औव्हर रेटिंग की जांच कर रहे उड़नदस्ता के अधिकारियों पर विभाग के बड़े भ्रष्ट अधिकारियों की वक्र दृष्टि पड़ गई है। जो आबकारी विभाग में ईमानदारी के साथ काम कर रहे उन पर विभाग की गाज गिर रही है। माना जा रहा है कि विभाग के भ्रष्ट अधिकारी ओव्हर रेटिंग की जांच को प्रभावित कर रोकने की साजिश को अंजाम देने में लगे हुए है ताकि उनका ओव्हर रेटिंग कमीशन पूर्ववत मिलता रहे। इन खुलासों से आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से शराब दुकानों में ओवररेटिंग की शिकायतें मिल रही थीं। अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं। कहा जा रहा है कि राज्य स्तरीय उडऩदस्ता की इस कार्रवाई ने विभागीय निगरानी पर चर्चा तेज कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की कुछ शराब दुकानों में पहले भी अधिक कीमत वसूली जाती थी। उडऩदस्ता की कार्रवाई के बाद अब आबकारी विभाग से आगे की जांच की अपेक्षा है। संभावित कार्रवाई पर भी सभी की नजर बनी हुई है। विभाग को इन शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
नष्टीकरण के बजाय बाजार में बेच रहे एक्सपायरी शराब
आबकारी विभाग के अनुसार बहुत पुरानी हो चुकी या बिक्री अवधि के करीब पहुंच चुकी शराब और बीयर को नष्ट करने का आदेश दिया जाता है। दुकानों और गोदामों से प्राप्त जानकारी के आधार पर सूची तैयार कर वेयरहाउस प्रभारी को नष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जाते हैं। आरोप है कि कागजों में नष्टीकरण दिखाने के बाद यही स्टॉक बाजार में बेच दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर: सेवन हिल्स बीयर की लगभग 100 पेटियां, जिन्हें एक्सपायरी के कारण नष्ट किया जाना था, अवैध रूप से बेच दी गईं। बडवाइजर बीयर की करीब 200 पेटियों को वास्तविक नुकसान से अधिक क्षतिग्रस्त दिखाया गया। परनोड कंपनी की इंपीरियल ब्लू (आईबी) शराब की लगभग 100 पेटियों को भी क्षतिग्रस्त खेप का हिस्सा बताकर अवैध रूप से बेचने का आरोप है। इस पूरे खेल में प्रभारी अधिकारी का संरक्षण और वेयरहाउस में पदस्थ कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है।