Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन को लेकर चिकित्सक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन (CGDF) ने 21 अक्टूबर 2026 को जारी निलंबन आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा की मांग की है। फेडरेशन ने इस मामले में छत्तीसगढ़ इन-सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन (CIDA) के रुख का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति और सेवा नियमों की रक्षा करना शासन की जिम्मेदारी है।
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि डॉ. गहवई ने स्वास्थ्य सेवा संचालनालय (DHS) में चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। फेडरेशन ने सवाल उठाया है कि जब यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब संबंधित याचिकाकर्ता चिकित्सक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई। हालांकि, फेडरेशन ने निलंबन को प्रतिशोधात्मक होने का स्थापित तथ्य नहीं बताया है। संगठन ने मांग की है कि इसकी निष्पक्ष जांच की जाए और यदि कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण या प्रतिशोधात्मक पाई जाती है, तो निलंबन आदेश निरस्त किया जाए।
21 अक्टूबर के निलंबन आदेश पर उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने कहा कि डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के खिलाफ जारी निलंबन आदेश के आधार और परिस्थितियों की पारदर्शी समीक्षा आवश्यक है। फेडरेशन के अनुसार, निलंबन आदेश में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 और 22(क) के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। संगठन का कहना है कि किसी भी चिकित्सक के खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन कार्रवाई का आधार उचित, स्पष्ट और निष्पक्ष होना चाहिए। CGDF ने स्पष्ट किया कि वह विधिसम्मत विभागीय कार्रवाई का विरोध नहीं करता। उसकी आपत्ति ऐसी कार्रवाई की संभावना को लेकर है, जिसमें पद का दुरुपयोग, दुर्भावना या प्रतिशोध शामिल हो सकता है।
हाईकोर्ट में पदस्थापना को चुनौती देने का मामला
डॉ. गहवई ने स्वास्थ्य सेवा संचालनालय में एडिशनल डायरेक्टर जैसे चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की नियुक्ति और पदस्थापना को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। फेडरेशन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों में निर्धारित भर्ती नियमों, संवर्गीय पात्रता और वरिष्ठता का पालन होना चाहिए। संगठन के अनुसार, न्यायालय में विचाराधीन इस मामले का संबंध केवल एक चिकित्सक से नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सकीय संवर्ग के सेवा अधिकारों से है। CGDF ने कहा कि अपने वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय की शरण लेना प्रत्येक चिकित्सक का अधिकार है। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेने वाले किसी चिकित्सक के खिलाफ होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई की परिस्थितियों की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना पर आपत्ति
डॉक्टर्स फेडरेशन ने स्वास्थ्य सेवा संचालनालय और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विशिष्ट तकनीकी क्षेत्र हैं। इनसे संबंधित प्रशासनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में चिकित्सकीय ज्ञान, अनुभव और निर्धारित संवर्गीय पात्रता का विशेष महत्व है। फेडरेशन के अनुसार, यदि चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर नियमों के विपरीत गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना होती है, तो इससे चिकित्सकों की वरिष्ठता और पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने आशंका जताई है कि ऐसी पदस्थापनाओं का प्रभाव स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। हालांकि, संबंधित पदस्थापनाएं वास्तव में सेवा नियमों का उल्लंघन करती हैं या नहीं, यह लागू नियमों और संबंधित अभिलेखों की समीक्षा से ही स्पष्ट होगा।
DHS के साथ DME की नियुक्तियों की भी समीक्षा की मांग
CGDF ने कहा कि चिकित्सकीय संवर्ग के प्रशासनिक पदों से जुड़ा विवाद केवल स्वास्थ्य सेवा संचालनालय तक सीमित नहीं है। संगठन के अनुसार, चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (DME) में भी चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित पदों पर गैर-चिकित्सकीय अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर सवाल मौजूद हैं। फेडरेशन ने मांग की है कि दोनों संचालनालयों में संबंधित पदों पर हुई नियुक्तियों की वैधानिक समीक्षा की जाए। समीक्षा के दौरान भर्ती नियमों, संवर्गीय पात्रता, वरिष्ठता और सेवा शर्तों का परीक्षण किया जाए। संगठन का कहना है कि प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित होना चाहिए।
न्यायालय जाने वाले चिकित्सकों पर दबाव न बने
डॉक्टर्स फेडरेशन ने कहा कि प्रत्येक चिकित्सक को अपने संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय जाने की स्वतंत्रता है। संगठन के मुताबिक, किसी चिकित्सक द्वारा न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के बाद उसके खिलाफ होने वाली कार्रवाई की निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। फेडरेशन ने आशंका जताई कि यदि न्यायिक अधिकारों के इस्तेमाल के कारण किसी चिकित्सक को प्रतिकूल कार्रवाई का सामना करना पड़े, तो इससे अन्य चिकित्सकों के बीच भय या दबाव का वातावरण बन सकता है। CGDF ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए प्रशासनिक फैसलों के आधार स्पष्ट होने चाहिए और संबंधित मामलों में स्थापित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
निलंबन की निष्पक्ष समीक्षा और निरस्तीकरण की मांग
फेडरेशन ने शासन से मांग की है कि डॉ. गहवई के निलंबन के कारणों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। संगठन ने कहा कि यदि समीक्षा में यह पाया जाता है कि निलंबन प्रतिशोधात्मक अथवा दुर्भावनापूर्ण आधार पर किया गया है, तो आदेश तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। इसके साथ ही फेडरेशन ने चिकित्सकीय संवर्ग के लिए निर्धारित प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों की समीक्षा करने और भविष्य में सेवा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि चिकित्सकों के सेवा संबंधी विवादों का समाधान निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
विभिन्न संवर्गों के चिकित्सकों का प्रतिनिधित्व करता है CGDF
छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने बताया कि वह प्रदेश के विभिन्न संवर्गों के चिकित्सकों का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें नियमित, संविदा, बॉन्डेड, स्नातकोत्तर, इंटर्न और विदेशी चिकित्सा स्नातक (FMG) सहित अन्य श्रेणियों के चिकित्सक शामिल हैं। फेडरेशन ने कहा कि चिकित्सकों के सम्मान, सेवा अधिकारों, वरिष्ठता, पात्रता और पदोन्नति से जुड़े मामलों में संगठन अपनी भूमिका निभाता रहेगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों से जुड़े विषयों पर वह अन्य चिकित्सक संगठनों के साथ खड़ा है।
जरूरत पड़ने पर न्यायिक और प्रशासनिक विरोध की चेतावनी
CGDF ने कहा कि यदि चिकित्सकों के वैधानिक अधिकारों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की जाती है, तो संगठन उसका न्यायिक, प्रशासनिक और लोकतांत्रिक स्तर पर विरोध करेगा। फेडरेशन ने शासन से चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों की रक्षा करने और विवादित पदस्थापनाओं के संबंध में नियमों के अनुरूप निर्णय लेने की मांग की है। संगठन ने यह भी दोहराया कि वह किसी भी चिकित्सक के खिलाफ उचित और निष्पक्ष विभागीय कार्रवाई का विरोध नहीं करता, लेकिन सभी प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता आवश्यक है। डॉक्टर्स फेडरेशन ने डॉ. धर्मेन्द्र कुमार गहवई के निलंबन की समीक्षा, DHS और DME में संबंधित पदस्थापनाओं की जांच तथा चिकित्सकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग दोहराई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में निलंबन आदेश के आधारों पर स्वास्थ्य विभाग का विस्तृत पक्ष और फेडरेशन की मांगों पर शासन की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। ऐसे में निलंबन के पीछे प्रतिशोध की आशंका को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। फेडरेशन का कहना है कि चिकित्सकीय संवर्ग के अधिकारों और सेवा नियमों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।