Balod. बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। चोरी के मामले में गिरफ्तार एक महिला आरोपी कोतवाली थाना परिसर से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गई। इस घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जानकारी के अनुसार, महिला आरोपी को चोरी के एक मामले में गिरफ्तार कर
कोतवाली थाना
परिसर में पुलिस अभिरक्षा में रखा गया था। शनिवार दोपहर के समय वह सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का फायदा उठाकर चुपचाप थाना परिसर से फरार हो गई। बताया जा रहा है कि उस समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी सामान्य निगरानी में थे।

इसी लापरवाही का फायदा उठाकर आरोपी महिला बाहर निकलने में सफल रही। जैसे ही महिला के फरार होने की जानकारी पुलिस को मिली, थाना परिसर में अफरा-तफरी मच गई। तुरंत ही पुलिस की अलग-अलग टीमों को सक्रिय किया गया और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। देर शाम तक लगातार तलाश के बावजूद महिला का कोई सुराग नहीं मिल सका, जिससे पुलिस की चिंता और बढ़ गई। घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। निलंबित किए गए कर्मचारियों में प्रधान आरक्षक शिवराम ध्रुव, आरक्षक उमेश निषाद और महिला आरक्षक पूर्णिमा ठाकुर शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि ड्यूटी के दौरान निगरानी में
गंभीर लापरवाही
बरती गई थी, जिसके चलते आरोपी महिला फरार हो गई।

पुलिस विभाग ने इस घटना को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई और किन परिस्थितियों में आरोपी महिला पुलिस अभिरक्षा से भागने में सफल रही। वहीं पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि फरार आरोपी महिला की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। आसपास के जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है और
मुखबिर तंत्र
को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इस घटना के बाद जिले की कानून व्यवस्था और थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब पुलिस अभिरक्षा से ही आरोपी फरार हो सकते हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति कितनी मजबूत है। पुलिस विभाग अब इस पूरे मामले को एक उदाहरण के तौर पर लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने की तैयारी में है।
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