गांधीनगर : 27 अक्टूबर 2026। गुजरात सरकार की 'एकीकृत डेयरी विकास योजना' (Integrated Dairy Development Project-IDDP) राज्य की आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की आय बढ़ाना तथा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में संचालित इस योजना के तहत महिलाओं को दुधारू पशु, पशु बीमा, परिवहन और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा सितंबर 2026 में साझा की गई जानकारी के अनुसार, योजना के तहत अब तक आदिवासी महिला लाभार्थियों को 1.85 लाख से अधिक पशु वितरित किए जा चुके हैं।
आदिवासी महिलाओं के लिए आय का नया जरिया
गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार खेती, मजदूरी और पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे परिवारों के लिए नियमित आय के अवसर उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती रही है।एकीकृत डेयरी विकास योजना के माध्यम से महिलाओं को दूध उत्पादन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे उन्हें परिवार की आय बढ़ाने और आर्थिक निर्णयों में भागीदारी करने का अवसर मिल रहा है।योजना की शुरुआत वित्त वर्ष 2007-08 में हुई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले अनुसूचित जनजाति परिवारों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ना था।
महिलाओं को पशुओं के साथ प्रशिक्षण की सुविधा
इस योजना की खासियत यह है कि महिलाओं को केवल दुधारू पशु उपलब्ध कराने तक सहायता सीमित नहीं रखी गई है।योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को पशु बीमा, परिवहन, पशु चिकित्सा सहायता और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी देने का प्रावधान है।उपलब्ध योजना विवरण के अनुसार, डेयरी इकाई की सहायता राशि लगभग 90 हजार रुपये तक हो सकती है, जिसमें लाभार्थी का अंशदान 3 हजार रुपये बताया गया है। हालांकि, आवेदन और सहायता की शर्तें संबंधित वित्त वर्ष के सरकारी दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती हैं।
महिलाओं को डेयरी उद्यमी बनाने पर जोर
गुजरात सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को डेयरी व्यवसाय में आगे बढ़ाने के लिए अक्टूबर 2026 में एक और पहल की है।10 अक्टूबर को राजकोट में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में गुजरात लाइवलीहुड प्रमोशन कंपनी लिमिटेड, सहकारिता विभाग और पशुपालन विभाग के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ।इस समझौते का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को डेयरी सहकारी संस्थाओं और पशुपालन विभाग की तकनीकी सेवाओं से जोड़ना है।इसके माध्यम से महिलाओं को बैंक ऋण, पशु खरीदने के लिए वित्तीय सहायता और डेयरी उपकरणों की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
दूध उत्पादन बढ़ाने और गरीबी घटाने का लक्ष्य
राज्य सरकार के आदिवासी विकास विभाग के अनुसार, एकीकृत डेयरी विकास परियोजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों को स्थायी आजीविका प्रदान करना हैयोजना के मूल लक्ष्यों में कम से कम 80 प्रतिशत भागीदार गरीब परिवारों को डेयरी गतिविधियों के आधार पर गरीबी रेखा से ऊपर लाने की परिकल्पना शामिल थी।इसके अलावा संबंधित जिलों में दूध संग्रहण में कम से कम 30 प्रतिशत वृद्धि तथा लाभार्थियों को अपनी बचत या संस्थागत ऋण से अतिरिक्त पशु खरीदने में सक्षम बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।ये योजना के घोषित लक्ष्य हैं, न कि सभी लक्ष्यों की उपलब्धि के सत्यापित आंकड़े।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
डेयरी व्यवसाय महिलाओं को घर के आसपास रहते हुए आय अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है। दूध की नियमित बिक्री से परिवारों को खेती के अलावा कमाई का दूसरा स्रोत मिल सकता है।हालांकि, पशुओं के चारे की लागत, दूध की कीमत, पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां भी हैं।उत्तर गुजरात के आदिवासी परिवारों पर प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं में डेयरी प्रबंधन तकनीकों को अपनाने और सामाजिक-आर्थिक सशक्तीकरण के संकेत अपेक्षाकृत बेहतर थे। अध्ययन में बढ़ती लागत और ऋण की उपलब्धता को प्रमुख चुनौतियां भी बताया गया।
आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
गुजरात सरकार की एकीकृत डेयरी विकास योजना आदिवासी महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण का अवसर उपलब्ध करा रही है।पशुपालन को संगठित व्यवसाय में बदलने, महिलाओं को सहकारी संस्थाओं से जोड़ने तथा आधुनिक प्रशिक्षण देने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।इस योजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि लाभार्थी महिलाओं को नियमित दूध बिक्री, उचित मूल्य, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और बाजार तक पर्याप्त पहुंच मिलती है या नहीं।
Tags: