भोजपुर। बिहार के भोजपुर जिले में 19 हजार से अधिक जिंदा कारतूस बरामद होने के मामले में अब बड़ा खुलासा हुआ है। अवैध कारतूसों की तस्करी के तार उत्तर प्रदेश के बदायूं से होते हुए हरियाणा तक पहुंच गए हैं। बिहार एसटीएफ से मिली महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर हरियाणा की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मंगलवार (3 नवंबर 2026) को झज्जर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कारों से 25 हजार जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इस दौरान एक महिला समेत पांच संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। लगातार दो राज्यों में इतनी बड़ी मात्रा में कारतूसों की बरामदगी से अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, हरियाणा एसटीएफ की रोहतक टीम ने झज्जर जिले के रोहद क्षेत्र में त्रिवेणी ढाबे के बाहर खड़ी दो संदिग्ध कारों की तलाशी ली। यह कार्रवाई बिहार एसटीएफ की ओर से साझा किए गए महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर की गई थी। पुलिस ने मौके पर खड़ी टाटा हैरियर और हुंडई ऑरा कार की जांच की। दोनों वाहनों से भारी मात्रा में जिंदा कारतूस मिलने के बाद पांच लोगों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया।
हरियाणा पुलिस के अनुसार, टाटा हैरियर कार से 24,400 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इस वाहन में तीन लोग सवार थे। वहीं, दूसरी हुंडई ऑरा कार से 600 कारतूस मिले, जिसमें दो लोग मौजूद थे। दोनों कारों से कुल 25 हजार जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके अलावा पुलिस ने आठ मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों की पहचान अफीफुद्दीन उर्फ मुन्ना खान (49), आसिम रईस (33), सबलू खान (32), अरबाज अली (27) और जीनत (33) के रूप में हुई है। सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के रहने वाले बताए गए हैं।पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोग कारतूसों के संबंध में वैध लाइसेंस या आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद एसटीएफ ने दोनों वाहनों, कारतूसों और मोबाइल फोन को कब्जे में ले लिया। मामले में झज्जर जिले के आसौधा थाने में आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इस बड़ी कार्रवाई की शुरुआत बिहार के भोजपुर जिले में हुई कारतूस बरामदगी से हुई थी। सोमवार को भोजपुर पुलिस और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने कोईलवर थाना क्षेत्र के कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास एक संदिग्ध वाहन की तलाशी ली थी। इस दौरान 19,250 जिंदा कारतूस और एक देसी पिस्टल बरामद की गई थी।भोजपुर पुलिस ने मौके से तीन संदिग्ध हथियार तस्करों को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए गए थे। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू की, जिसमें अंतरराज्यीय कारतूस आपूर्ति नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग सामने आए।
भोजपुर के पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित ने मंगलवार को बताया कि बिहार एसटीएफ से मिली खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस ने कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास वाहन को रोका था। तलाशी के दौरान अलग-अलग बोर के कारतूस मिलने के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।इस मामले में गिरफ्तार एक आरोपी की पहचान ललटू के रूप में हुई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि ललटू का संपर्क बदायूं निवासी अफीफुद्दीन उर्फ मुन्ना खान से था। आरोप है कि ललटू ने मुन्ना खान के माध्यम से कारतूस प्राप्त किए थे।इसी जानकारी के आधार पर बिहार एसटीएफ ने हरियाणा एसटीएफ से संपर्क किया और संदिग्ध कारतूस आपूर्ति नेटवर्क के बारे में सूचना साझा की। इसके बाद हरियाणा एसटीएफ की रोहतक टीम सक्रिय हुई और झज्जर में बड़ी खेप बरामद करने में सफलता प्राप्त की।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, अफीफुद्दीन उर्फ मुन्ना खान बदायूं के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में बदायूं गन हाउस नाम से कारोबार संचालित करता है। पुलिस को आशंका है कि इसी कारोबार की आड़ में अवैध कारतूसों की आपूर्ति का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि मुन्ना खान हरियाणा के सिरसा गया था। आरोप है कि वहां उसने एक स्थानीय व्यक्ति से बड़ी मात्रा में कारतूस प्राप्त किए थे। संबंधित व्यक्ति को गन हाउस का संचालक बताया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप और कारतूसों की आपूर्ति के वास्तविक स्रोत की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
हरियाणा में पकड़ी गई खेप के बाद अब बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की पुलिस एजेंसियां एक-दूसरे के संपर्क में हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस कहां से खरीदे गए, किसके माध्यम से भेजे जा रहे थे और इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।भोजपुर और झज्जर में हुई दोनों कार्रवाइयों को मिलाकर अब तक 44,250 जिंदा कारतूस बरामद किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी मात्रा में कारतूसों की बरामदगी ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि कारतूसों की आपूर्ति केवल बिहार तक सीमित थी या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा जब्त मोबाइल फोन की जांच से संदिग्ध संपर्कों, खरीद-बिक्री और संभावित ग्राहकों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में जिंदा कारतूस वैध आपूर्ति व्यवस्था से बाहर कैसे पहुंचे। यदि जांच में किसी लाइसेंसधारी गन हाउस की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री और स्टॉक का मिलान भी महत्वपूर्ण होगा।पुलिस इस बात का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कारतूसों की खरीद में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और कहीं अवैध तरीके से अधिक मात्रा में गोला-बारूद तो नहीं जुटाया गया।कारतूसों की तस्करी का मामला केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है। हथियार और गोला-बारूद की गैरकानूनी आपूर्ति संगठित अपराध तथा अन्य हिंसक गतिविधियों का जोखिम बढ़ा सकती है। हालांकि, वर्तमान मामले में बरामद कारतूस किसी विशेष आपराधिक गिरोह या घटना के लिए भेजे जा रहे थे, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। विशेष रूप से बदायूं के कथित आपूर्ति केंद्र, सिरसा में कारतूसों के संभावित स्रोत और बिहार में पकड़े गए आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है।अब इस मामले में आगे की जांच से स्पष्ट होगा कि बरामद कारतूसों की अंतिम डिलीवरी कहां होनी थी और इस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं।फिलहाल हरियाणा एसटीएफ की कार्रवाई को बिहार पुलिस से मिली सूचना के आधार पर मिली बड़ी सफलता माना जा रहा है। भोजपुर में 19,250 कारतूस बरामद होने के बाद झज्जर में 25 हजार और जिंदा कारतूस मिलना इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसियों के सामने अवैध गोला-बारूद की आपूर्ति से जुड़ा एक बड़ा मामला है।