पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम, 5 साल से प्लास्टिक के खाली पैकेट जमा कर रहीं सिमरन
पानीपत। पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े अभियान चलाने के साथ छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण होते हैं। इसी सोच को अपनाकर सेक्टर-12 की रहने वाली सिमरन बठला पिछले पांच वर्षों से प्लास्टिक कचरे के उचित निस्तारण की मुहिम चला रही हैं। जिस प्लास्टिक को अधिकतर लोग इस्तेमाल करने के बाद बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं, सिमरन उसे अलग एकत्र करती हैं। घर में इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की वस्तुओं के खाली प्लास्टिक पैकेटों को वह सामान्य कचरे में नहीं मिलने देतीं। करीब 20 से 25 दिनों में उनके पास प्लास्टिक के खाली पैकेटों से एक कट्टा भर जाता है। इसके बाद वह इस सामग्री को रिसाइकिलिंग के लिए भेज देती हैं। उनका यह प्रयास दिखाता है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत अपने घर से भी की जा सकती है।
पांच वर्षों से लगातार कर रहीं प्लास्टिक का संग्रह
सिमरन बठला ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से करीब पांच साल पहले घर में निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को अलग जमा करना शुरू किया था।
समय के साथ यह काम उनकी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बन गया। अब घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के खाली पैकेटों को अन्य घरेलू कचरे से अलग रखा जाता है।
इनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल के बाद बचने वाली विभिन्न प्रकार की प्लास्टिक पैकेजिंग शामिल हो सकती है।
सिमरन की कोशिश रहती है कि प्लास्टिक सामान्य कचरे में मिलकर इधर-उधर न फैले और उसे उचित निस्तारण के लिए भेजा जा सके।
पिछले पांच वर्षों से लगातार इस व्यवस्था को अपनाना पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
20 से 25 दिनों में भर जाता है एक कट्टा
सिमरन के घर से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 20 से 25 दिनों में खाली पैकेटों से एक कट्टा भर जाता है।
एकत्र सामग्री को वह रिसाइकिलिंग के लिए भेज देती हैं। इसके बाद दोबारा प्लास्टिक पैकेट जमा करने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
घर में निकलने वाले कचरे को अलग-अलग रखना सुनने में भले ही सामान्य बात लगे, लेकिन इसे लगातार अपनाने के लिए नियमित ध्यान और अनुशासन की आवश्यकता होती है।
सिमरन का प्रयास इसी निरंतरता का उदाहरण है।
उनकी पहल यह भी बताती है कि किसी एक घर में सीमित अवधि के दौरान कितनी मात्रा में प्लास्टिक पैकेजिंग जमा हो सकती है।
सामान्य कचरे में प्लास्टिक मिलने से बढ़ती है समस्या
घरों से निकलने वाले कचरे में प्लास्टिक का हिस्सा लगातार पर्यावरण प्रबंधन के लिए चुनौती बना हुआ है।
खाली पैकेट, रैपर और अन्य प्लास्टिक पैकेजिंग को जब गीले कचरे के साथ फेंक दिया जाता है, तो उनकी छंटाई कठिन हो जाती है।
ऐसी स्थिति में प्लास्टिक का कुछ हिस्सा कूड़े के ढेर, नालियों और खुले स्थानों तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कई प्रकार के प्लास्टिक प्राकृतिक वातावरण में बहुत धीरे-धीरे टूटते हैं। इनके छोटे कण मिट्टी और जलस्रोतों तक भी पहुंच सकते हैं।
इसलिए घर से निकलते समय ही प्लास्टिक कचरे को अलग रखना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उपयोगी कदम माना जाता है।
रिसाइकिलिंग के लिए भेजती हैं एकत्र पैकेट
सिमरन बठला की पहल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह प्लास्टिक को केवल जमा करके नहीं रखतीं, बल्कि उसे रिसाइकिलिंग के लिए भेजती हैं।
इससे कचरे के उचित प्रबंधन की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।
हालांकि, सभी प्लास्टिक पैकेट एक ही तरीके से रिसाइकिल नहीं किए जा सकते। उनकी बनावट और सामग्री के आधार पर अलग-अलग प्रक्रिया की आवश्यकता होती है।
विशेष रूप से कई परतों वाली प्लास्टिक पैकेजिंग का पुनर्चक्रण सामान्य प्लास्टिक की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
ऐसे में अधिकृत कचरा संग्रहकर्ताओं और उपयुक्त प्रसंस्करण केंद्रों तक प्लास्टिक पहुंचाना जरूरी है।
पांच साल की मेहनत बनी प्रेरणादायक उदाहरण
सिमरन की यह कोशिश बताती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किसी बड़े संगठन या भारी खर्च की आवश्यकता हमेशा नहीं होती।
घर में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के खाली पैकेटों को अलग रखने जैसा छोटा कदम भी नियमित रूप से अपनाया जाए, तो कचरा प्रबंधन में योगदान दिया जा सकता है।
पांच साल से इस प्रक्रिया को जारी रखना उनकी पहल का महत्वपूर्ण पहलू है।
आमतौर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं, लेकिन लोगों की रोजमर्रा की आदतों में बदलाव लाना भी उतना ही जरूरी है।
सिमरन का प्रयास इसी व्यवहारिक बदलाव का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
घर-घर अपनाई जा सकती है यह आदत
यदि परिवार घर में ही गीले, सूखे और अन्य विशेष प्रकार के कचरे को अलग रखने की आदत डालें, तो कचरे का प्रबंधन आसान हो सकता है।
रसोई से निकलने वाले जैविक कचरे को खाद बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कागज, धातु और उपयुक्त प्लास्टिक जैसी सामग्रियों को रिसाइकिलिंग के लिए भेजा जा सकता है।
इस व्यवस्था का लाभ तभी अधिक मिलता है, जब एकत्र सामग्री को सही तरीके से आगे पहुंचाया जाए।
सिमरन की तरह घरेलू स्तर पर प्लास्टिक पैकेट अलग रखना इस दिशा में एक सरल शुरुआत हो सकती है।
प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना भी जरूरी
पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल प्लास्टिक की रिसाइकिलिंग पर्याप्त नहीं है। अनावश्यक प्लास्टिक का उपयोग घटाना भी महत्वपूर्ण है।
खरीदारी के समय कपड़े या टिकाऊ थैले का उपयोग, दोबारा इस्तेमाल होने वाले डिब्बों को प्राथमिकता और कम पैकेजिंग वाले उत्पादों का चयन कचरे की मात्रा कम कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में उपयोग कम करना, दोबारा इस्तेमाल करना और पुनर्चक्रण तीनों महत्वपूर्ण हैं।
सिमरन की पहल इनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्से, यानी कचरे को अलग एकत्र कर रिसाइकिलिंग तक पहुंचाने, पर केंद्रित है।
समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
पर्यावरण संरक्षण की सफलता काफी हद तक आम नागरिकों की भागीदारी पर निर्भर करती है।
कई बार लोग प्लास्टिक कचरे के नुकसान के बारे में जानते हैं, लेकिन उसे अलग रखने की आदत नहीं अपनाते।
ऐसे में सिमरन जैसे व्यक्तिगत प्रयास दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं।
आवासीय कॉलोनियों, स्कूलों और स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से कचरा पृथक्करण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सकती है।
यदि अलग-अलग परिवार इस दिशा में सक्रिय हों, तो सामान्य कचरे में मिलने वाली पुनर्चक्रण योग्य सामग्री की मात्रा कम की जा सकती है।
पर्यावरण के लिए जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश
सिमरन बठला का प्रयास इस बात का उदाहरण है कि पर्यावरण की जिम्मेदारी केवल प्रशासन या सफाई कर्मचारियों की नहीं है।
कचरा पैदा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भी उसके उचित निस्तारण में भूमिका होती है।
अपने घर से निकलने वाले प्लास्टिक के पैकेटों को अलग जमा करके वह इसी जिम्मेदारी को निभाने की कोशिश कर रही हैं।
उनके इस प्रयास से घरेलू कचरे के बेहतर प्रबंधन का संदेश मिलता है।
यह पहल दिखाती है कि दैनिक जीवन में छोटे बदलाव लाकर पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी की जा सकती है।
छोटी पहल से बड़े बदलाव की उम्मीद
सेक्टर-12 की सिमरन बठला पिछले पांच वर्षों से लगातार प्लास्टिक के खाली पैकेट एकत्र कर रही हैं। लगभग हर 20 से 25 दिन में एक कट्टा भरने के बाद उसे रिसाइकिलिंग के लिए भेज देती हैं।
उनकी यह मुहिम घर से निकलने वाले कचरे को जिम्मेदारी से संभालने की सीख देती है।
यदि अधिक लोग ऐसी आदत अपनाएं और स्थानीय स्तर पर कचरे के संग्रह तथा पुनर्चक्रण की उचित व्यवस्था उपलब्ध हो, तो पर्यावरण पर प्लास्टिक कचरे का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
सिमरन का प्रयास संदेश देता है कि पर्यावरण बचाने के लिए बदलाव की शुरुआत अपने घर से ही की जा सकती है।