11 साल बाद भी नहीं सुलझा बाईपास जमीन विवाद

Update: 2026-07-23 12:51 GMT

गोहाना। सोनीपत जिले के गोहाना में प्रस्तावित पश्चिमी बाईपास परियोजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है। करीब 11 वर्षों से चल रही इस योजना को अभी तक धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। परियोजना में सबसे बड़ी बाधा भूमि अधिग्रहण और किसानों की मुआवजे को लेकर मांग बनी हुई है। किसान कलेक्टर रेट से कई गुना अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण बाईपास निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

गोहाना पश्चिमी बाईपास की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। शहर के बीच से भारी वाहनों की आवाजाही होने के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनती है। ट्रकों और बड़े वाहनों के कारण शहर के मुख्य मार्गों पर यातायात दबाव बढ़ जाता है, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए पश्चिमी बाईपास परियोजना की योजना बनाई गई थी।

जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वर्ष 2015 में गोहाना में पश्चिमी बाईपास बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद वर्ष 2019 में सरकार की ओर से परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी भी दे दी गई थी। हालांकि, जब जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई तो किसानों ने मुआवजे को लेकर अपनी मांग रख दी। किसानों का कहना था कि उन्हें जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और मुआवजा कलेक्टर रेट से कई गुना अधिक दिया जाना चाहिए।

किसानों की मांग के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी और बाईपास निर्माण का काम ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद वर्ष 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर गोहाना पश्चिमी बाईपास बनाने की घोषणा की। भाजपा सरकार बनने और गोहाना से डॉ. अरविंद शर्मा के विधायक बनने के बाद परियोजना को दोबारा शुरू करने के प्रयास तेज किए गए।

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार ने ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से किसानों से जमीन देने की सहमति मांगी। इस प्रक्रिया में करीब 50 प्रतिशत किसानों ने अपनी सहमति भी दी, लेकिन मुआवजे की मांग को लेकर सहमति पूरी तरह नहीं बन पाई। किसानों का कहना है कि जमीन का बाजार मूल्य कलेक्टर रेट से काफी अधिक है, इसलिए उन्हें उसी हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए।

दूसरी ओर, प्रशासन और सरकार परियोजना को जल्द पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि बाईपास बनने से शहर के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। इससे लोगों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी और शहर के विकास को भी गति मिलेगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गोहाना में बाईपास की मांग कई वर्षों से चली आ रही है। भारी वाहनों के कारण शहर की सड़कों पर हर दिन जाम लगता है। कई बार आपातकालीन सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों और आम नागरिकों को भी यातायात अव्यवस्था का नुकसान उठाना पड़ता है।

वहीं किसान अपनी मांगों पर कायम हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों के लिए जमीन देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जमीन का उचित मूल्य मिलना जरूरी है। किसानों और प्रशासन के बीच सहमति बनने के बाद ही इस महत्वपूर्ण परियोजना का रास्ता साफ हो सकेगा।

फिलहाल गोहाना पश्चिमी बाईपास परियोजना एक बार फिर मुआवजे के मुद्दे में फंसी हुई है। अब देखना होगा कि सरकार और किसानों के बीच बातचीत से कब समाधान निकलता है और 11 वर्षों से लंबित यह योजना कब जमीन पर उतर पाती है।

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