करनाल: परिषद की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिला परिषद की चेयरमैन परवेश सोहन राणा को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से हटा दिया गया है। अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बैठक में चेयरमैन के खिलाफ भारी बहुमत सामने आया, जिसके बाद उन्हें अपने पद से पदमुक्त कर दिया गया। इस फैसले के साथ ही जिला परिषद में लंबे समय से चल रही राजनीतिक हलचल पर विराम लग गया है।
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आयोजित बैठक में जिला परिषद के कुल 25 पार्षदों में से 19 पार्षद शामिल हुए। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आए परिणाम में 17 पार्षदों ने चेयरमैन परवेश राणा के खिलाफ मतदान किया, जबकि केवल 2 पार्षदों ने उनके समर्थन में वोट दिया। बहुमत नहीं मिलने के कारण चेयरमैन को पद छोड़ना पड़ा।
अविश्वास प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमित कुमार की निगरानी में संपन्न हुई। प्रशासन की मौजूदगी में मतदान कराया गया और सभी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुसार पूरा किया गया। मतदान के नतीजे आने के बाद साफ हो गया कि चेयरमैन के खिलाफ पार्षदों का बहुमत है।
चेयरमैन परवेश राणा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पीछे कई आरोप लगाए गए थे। पार्षदों का आरोप था कि जिला परिषद की ग्रांट का वितरण समान रूप से नहीं किया गया। कुछ क्षेत्रों को प्राथमिकता मिलने और अन्य क्षेत्रों की अनदेखी किए जाने को लेकर नाराजगी जताई गई थी। इसके अलावा चेयरमैन के पति पर सरकारी वाहन के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए थे।
इन आरोपों के बाद जिला परिषद के कई पार्षदों ने चेयरमैन के नेतृत्व पर सवाल उठाए और अविश्वास प्रस्ताव की मांग की थी। इसके बाद प्रशासन की ओर से बैठक बुलाकर नियमों के तहत मतदान कराया गया। मतदान में बड़ी संख्या में पार्षदों ने चेयरमैन के खिलाफ अपना मत दिया।
करनाल जिला परिषद में हुए इस घटनाक्रम को स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। जिला परिषद के अध्यक्ष पद पर अब नए चेहरे की तलाश शुरू होगी। आने वाले दिनों में नए चेयरमैन के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
जिला परिषद स्थानीय विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, विकास योजनाओं, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य कार्यों के लिए मिलने वाली सरकारी राशि के वितरण और निगरानी की जिम्मेदारी परिषद के पास होती है। ऐसे में चेयरमैन पद में बदलाव का असर आने वाले विकास कार्यों और परिषद की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है।
परवेश राणा को पद से हटाए जाने के बाद अब जिला परिषद के अंदर नए समीकरण बन सकते हैं। जिन पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया है, वे नए नेतृत्व को लेकर अपनी रणनीति तैयार करेंगे। वहीं, प्रशासन की नजर अब परिषद में आगे की प्रक्रिया पर रहेगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, किसी भी स्थानीय निकाय में अविश्वास प्रस्ताव का पास होना बड़ा घटनाक्रम माना जाता है, क्योंकि इसके लिए निर्वाचित सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। करनाल जिला परिषद में 17 पार्षदों का विरोध में मतदान यह दर्शाता है कि चेयरमैन के खिलाफ काफी समय से असंतोष मौजूद था।
अब सभी की नजर नए चेयरमैन के चुनाव और जिला परिषद की आगामी कार्यप्रणाली पर टिकी हुई है। प्रशासन जल्द ही आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकता है, जिससे परिषद को नया नेतृत्व मिल सके और विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके।