चंडीगढ़ : हरियाणा में नगर निकायों और दमकल विभाग के कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के बीच मंगलवार को आंदोलन को लेकर बड़ा और निर्णायक फैसला लिया जाएगा। हड़ताल को आगे बढ़ाने और इसे और व्यापक स्तर पर तेज करने की रणनीति पर चर्चा के लिए कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त बैठक बुलाई है। यह बैठक 11 अगस्त को रोहतक स्थित कर्मचारी भवन में आयोजित की जाएगी। इसमें नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा और हरियाणा अग्निशमन विभाग कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी शामिल होंगे। बैठक में मौजूदा हड़ताल की स्थिति की समीक्षा करने के साथ ही आगे की रणनीति पर अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, दोनों विभागों के कर्मचारी लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार से बातचीत करते रहे हैं। कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि सरकार के साथ बातचीत के दौरान कई मांगों पर सहमति बनने के बावजूद उन्हें अब तक लागू नहीं किया गया है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने तीन दिनों की हड़ताल का निर्णय लिया। अब मंगलवार को होने वाली संयुक्त राज्य कार्यकारिणी की बैठक में यह तय किया जाएगा कि हड़ताल को समाप्त किया जाए या इसे आगे बढ़ाकर सरकार पर दबाव बढ़ाया जाए।
नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री के अनुसार, हड़ताल का असर प्रदेश के 83 नगर निकायों में दिखाई दे रहा है। उनका दावा है कि नगर निकायों में कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके अलावा प्रदेश के 103 दमकल केंद्रों के कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारी संगठन का दावा है कि करीब 50 हजार कर्मचारी इस समय आंदोलन का हिस्सा हैं। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से शहरों में कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर सफाई व्यवस्था, सीवर सफाई, पार्कों के रखरखाव और स्ट्रीट लाइट जैसी नागरिक सेवाओं पर पड़ रहा है। नगर निकायों के कार्यालयों में भी नियमित कामकाज बाधित होने का दावा कर्मचारी नेताओं ने किया है। दमकल विभाग के कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से अग्निशमन सेवाओं को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि आपात स्थिति में आवश्यक सेवाओं को लेकर प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की संभावना रहती है, लेकिन लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है।
कर्मचारी नेताओं का मुख्य आरोप सरकार पर वादाखिलाफी का है। उनका कहना है कि 13 मई को सरकार और कर्मचारियों के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते में कर्मचारियों की 17 मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन कई मांगों को अब तक लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि समझौते को लागू करने में देरी के कारण उनके बीच नाराजगी बढ़ती गई और अंततः उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ठेका प्रथा को पूरी तरह समाप्त करना और सभी कर्मचारियों को विभाग के रोल पर लेना शामिल है। इसके अलावा कर्मचारियों के नियमित होने तक न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने, ईएसआई और ईपीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने तथा जोखिम भत्ता उपलब्ध कराने की मांग भी की जा रही है। कर्मचारी संगठन नगर निकायों और दमकल विभाग में नई नियमित भर्तियां शुरू करने की भी मांग कर रहे हैं, ताकि खाली पदों को भरा जा सके और कर्मचारियों पर बढ़ते काम के दबाव को कम किया जा सके।
कर्मचारी नेताओं ने पालिका, परिषद और निगमों में ग्रुप-डी तथा ग्रुप-सी के करीब 1450 पदों को समाप्त किए जाने का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि इन पदों को खत्म करने से पहले से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे नगर निकायों पर और दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा लगभग 300 अन्य पदों को भी समाप्त करने की प्रक्रिया में शामिल किए जाने का कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है। संगठन का तर्क है कि कर्मचारियों की संख्या कम होने से सफाई, सीवर, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करना मुश्किल होगा।
हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने करनाल में सफाई कर्मचारी के बेटे वीरू वाल्मीकि की हत्या का मुद्दा भी उठाया है। कर्मचारी संगठनों ने इस मामले में पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग की है। उनकी मांग है कि परिवार को तत्काल 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने और हत्या के सभी आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग भी की गई है।
अब सभी की नजरें 11 अगस्त को रोहतक में होने वाली संयुक्त राज्य कार्यकारिणी की बैठक पर हैं। इसी बैठक में कर्मचारी संगठन आगे की रणनीति तय करेंगे। यदि हड़ताल बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है तो आने वाले दिनों में हरियाणा के शहरों में सफाई, सीवर, स्ट्रीट लाइट और अन्य नगर निकाय सेवाओं पर इसका असर और बढ़ सकता है। वहीं सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलता है या आंदोलन लंबा खिंचता है, इसका फैसला मंगलवार की बैठक के बाद स्पष्ट होगा।