हिसार। हरियाणा के हिसार जिले में कथित फर्जी मेडिकल और प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों के आधार पर नए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने तथा पुराने लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की जांच रिपोर्ट के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते को गुप्त सूचना मिली थी कि हिसार में सक्रिय कुछ निजी टाइपिस्ट कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में लोगों की सहायता कर रहे हैं। शिकायत में एसडीएम कार्यालय के कुछ कर्मचारियों के साथ संभावित मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया था। हालांकि किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका की पुष्टि अभी नहीं हुई है और यह पुलिस जांच का विषय है।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री उड़नदस्ते की हिसार रेंज प्रभारी सुनैना के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। टीम ने सबसे पहले हिसार एसडीएम कार्यालय से नए ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण से संबंधित रिकॉर्ड हासिल किया। इसके बाद चयनित आवेदनों के साथ लगाए गए दस्तावेजों की जांच की गई।
टीम ने आवेदनों के साथ संलग्न मेडिकल प्रमाणपत्र, प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और उनकी रसीदों का मिलान किया। इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने के लिए उन्हें संबंधित अस्पतालों और प्रशिक्षण संस्थानों में सत्यापन के लिए भेजा गया। जांच के दौरान कुछ दस्तावेजों में अंतर मिलने के बाद उड़नदस्ते ने मामले की पड़ताल का दायरा बढ़ा दिया।
एक नए ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन में संलग्न प्राथमिक चिकित्सा प्रमाणपत्र की रसीद और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र के विवरण में अंतर पाया गया। रसीद में दर्ज जानकारी प्रमाणपत्र पर मौजूद विवरण से मेल नहीं खा रही थी। इस गड़बड़ी के बाद अधिकारियों को दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ।
जांच में एसडीएम कार्यालय हिसार से नवीनीकृत किए गए तीन पुराने ड्राइविंग लाइसेंस भी सामने आए। इन आवेदनों के साथ लगाए गए मेडिकल प्रमाणपत्रों को सत्यापन के लिए नागरिक अस्पताल हिसार भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल के उपलब्ध रिकॉर्ड में तीनों मेडिकल प्रमाणपत्रों से संबंधित प्रविष्टियां नहीं मिलीं। इसके बाद प्रमाणपत्रों के कथित रूप से फर्जी होने की आशंका मजबूत हुई।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में प्रविष्टि नहीं मिलना जांच का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन दस्तावेजों को अंतिम रूप से फर्जी साबित करने के लिए हस्ताक्षर, मुहर, जारीकर्ता अधिकारी और डिजिटल रिकॉर्ड सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी। पुलिस संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों के बयान दर्ज कर सकती है।
मुख्यमंत्री उड़नदस्ते ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस को लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने और उनके आधार पर ड्राइविंग लाइसेंस जारी अथवा नवीनीकृत कराने के आरोपों में मामला दर्ज किया है। आरोपियों का अपराध अदालत में साबित होना अभी बाकी है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी मेडिकल और प्राथमिक चिकित्सा प्रमाणपत्र कहां तैयार किए गए। जांच में यह भी देखा जाएगा कि इन दस्तावेजों के बदले कितनी रकम ली गई और इसमें निजी टाइपिस्टों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से संबंधित शिकायत की भी जांच की जाएगी।
रिकॉर्ड की व्यापक जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ऐसे दस्तावेजों का इस्तेमाल केवल इन मामलों में हुआ या पहले भी कई ड्राइविंग लाइसेंस इसी तरीके से बनवाए गए। पुलिस संबंधित आवेदकों, टाइपिस्टों, दस्तावेज जारी करने वाले कथित संस्थानों और लाइसेंस प्रक्रिया में शामिल लोगों से पूछताछ कर सकती है।
ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में मेडिकल प्रमाणपत्र और कुछ श्रेणियों में प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण का दस्तावेज महत्वपूर्ण होता है। इनकी मदद से आवेदक की वाहन चलाने की शारीरिक क्षमता और आपात स्थिति में प्राथमिक सहायता की जानकारी का आकलन किया जाता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस जारी होना सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
फिलहाल छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि साक्ष्यों के आधार पर अन्य लोगों के नाम सामने आने पर उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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