Sirsa सिरसा राइस मिलरों की मांगों पर बढ़ा विवाद, खरीद रोकने की चेतावनी से बढ़ी चिंता

हरियाणा के सिरसा जिले में राइस मिलरों और प्रशासन के बीच मांगों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। राइस मिलरों ने अपनी कई लंबित मांगों को लेकर नाराजगी जताई है और समाधान नहीं होने पर धान की खरीद प्रक्रिया को प्रभावित करने की चेतावनी दी है। मिलरों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण उनके लिए काम करना मुश्किल हो रहा है। राइस मिलरों की प्रमुख मांगों में धान मिलिंग से जुड़े नियमों में राहत, भुगतान प्रक्रिया में तेजी, भंडारण और परिवहन व्यवस्था में सुधार सहित कई मुद्दे शामिल हैं। मिलरों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे खरीद प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेंगे।

धान खरीद सीजन के दौरान राइस मिलरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसान मंडियों में धान लेकर पहुंचते हैं, जिसके बाद उसकी खरीद, उठान, भंडारण और मिलिंग की प्रक्रिया में मिलरों की अहम भूमिका रहती है। ऐसे में यदि मिलर किसी कारण से काम रोकते हैं तो इसका असर किसानों और सरकारी खरीद व्यवस्था पर पड़ सकता है।

मिलरों की चेतावनी के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। अधिकारियों ने मिलरों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान निकालने की कोशिश शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और खरीद व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। वहीं, राइस मिलरों का कहना है कि वे भी किसानों के हितों को ध्यान में रखते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान होना जरूरी है। उनका कहना है कि बिना उचित व्यवस्था और सुविधाओं के धान की मिलिंग प्रक्रिया को सही तरीके से चलाना कठिन हो जाता है।

इस विवाद के बीच किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। धान खरीद में किसी भी तरह की देरी का असर किसानों की फसल बिक्री और भुगतान पर पड़ सकता है। किसान संगठनों ने भी मांग की है कि सरकार और मिलरों के बीच जल्द बातचीत कर समाधान निकाला जाए, ताकि खरीद प्रक्रिया प्रभावित न हो। फिलहाल सिरसा में राइस मिलरों और प्रशासन के बीच बातचीत का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और मिलरों के बीच सहमति बनती है या फिर खरीद व्यवस्था को लेकर कोई बड़ा संकट खड़ा होता है। प्रशासन की प्राथमिकता किसानों की फसल की समय पर खरीद और भुगतान सुनिश्चित करना है, जबकि मिलर अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं।

Tags: