ग्रीन रेलवे की ओर कदम, 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना

Update: 2026-07-15 13:27 GMT

चंडीगढ़। भारतीय रेलवे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जो हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेनें डीजल पर निर्भरता कम करेंगी और प्रदूषण घटाने में मदद करेंगी। भारतीय रेलवे का यह कदम देश के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी इसी कार्यक्रम के दौरान अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकसित किए गए जींद और नरवाना रेलवे स्टेशनों का भी लोकार्पण करेंगे। इन स्टेशनों को यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है।

रेलवे की योजना केवल पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है। भविष्य में देश के विभिन्न हेरिटेज और पर्वतीय रेल मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की तैयारी है। इसके लिए ‘हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज’ योजना के तहत करीब 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को शामिल करने की योजना बनाई गई है।

इन ट्रेनों को खासतौर पर उन मार्गों पर चलाने की योजना है, जहां पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखना जरूरी है। पर्वतीय और विरासत रेल मार्गों पर डीजल इंजन के विकल्प के रूप में हाइड्रोजन तकनीक को इस्तेमाल किया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें आधुनिक तकनीक पर आधारित होंगी और इनमें ऊर्जा की बचत के साथ-साथ कम प्रदूषण की सुविधा होगी। यह तकनीक भविष्य में भारतीय रेलवे के हरित परिवर्तन में अहम भूमिका निभा सकती है।

एक हाइड्रोजन ट्रेन की अनुमानित लागत करीब 80 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि शुरुआती चरण में इसकी लागत अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह ईंधन खर्च और प्रदूषण नियंत्रण के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकती है।

हरियाणा को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए चुना जाना राज्य के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जींद से शुरू होने वाली यह पहल भविष्य में देशभर में हरित रेल नेटवर्क के विस्तार का रास्ता खोल सकती है।

भारत में रेलवे लगातार इलेक्ट्रिफिकेशन, सौर ऊर्जा और अन्य हरित तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी दिशा में एक नया अध्याय है। दुनिया के कई देश पहले से ही हाइड्रोजन आधारित रेल तकनीक पर काम कर रहे हैं और अब भारत भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है।

रेलवे का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में परिवहन क्षेत्र को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जाए। हाइड्रोजन ट्रेनें न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेंगी, बल्कि देश में नई तकनीक और स्वदेशी निर्माण को भी बढ़ावा देंगी।

17 जुलाई को जींद से शुरू होने वाली यह ट्रेन भारतीय रेलवे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इससे देश में भविष्य की ग्रीन मोबिलिटी को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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