चंडीगढ़। हरियाणा सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और प्रदूषण कम करने के लिए अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। नई व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले लोगों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी सीधे उनके खाते में भेजने की योजना बनाई जा रही है। इससे खरीदारों को वाहन खरीदते समय ही आर्थिक लाभ मिल सकेगा।
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, कारों और टाटा मैजिक जैसे ई-वाहनों पर दी जाने वाली सब्सिडी की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं और प्रदेश में प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सके।
हरियाणा ई-वाहन नीति की समीक्षा बैठक में मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ी चुनौती है। हरियाणा का बड़ा हिस्सा NCR में आता है, इसलिए राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है। खासकर गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक व शहरी क्षेत्रों में ई-वाहनों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार हरियाणा ई-वाहन नीति-2022 में दिल्ली की तर्ज पर जरूरी बदलाव करने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नीति को अधिक प्रभावी बनाया जाए, जिससे लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने में आसानी हो और उन्हें समय पर सरकारी सहायता मिल सके।
बैठक में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। योजना के तहत प्रदेश के चार जिलों में 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। इन चार्जिंग स्टेशनों से इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ निजी ई-वाहन चालकों को भी सुविधा मिलेगी।
गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण को देखते हुए इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत को अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम होगी और हवा की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
हरियाणा सरकार केंद्र की पीएम ई-वाहन जैसी योजनाओं के साथ तालमेल बनाकर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़े और लोगों को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प उपलब्ध हो सकें।
नई सब्सिडी व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन खरीदारों को आवेदन और भुगतान की लंबी प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है। सीधे बैंक खाते में सब्सिडी पहुंचने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
सरकार का कहना है कि ई-वाहन नीति में बदलाव केवल प्रदूषण कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नई तकनीक, रोजगार और हरित परिवहन व्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में हरियाणा में इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार देखने को मिल सकता है।