पानीपत। हरियाणा के पानीपत जिले में बेमौसम बारिश ने किसानों और अनाज मंडी के आढ़तियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुवार देर रात से शुरू हुई बारिश के कारण अनाज मंडियों में खुले में रखा हजारों मीट्रिक टन धान भीग गया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे बोरियों में भरा धान और खुले में सुखाने के लिए रखी फसल पानी की चपेट में आ गई। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, जिले की विभिन्न मंडियों में करीब 5500 मीट्रिक टन धान बारिश से प्रभावित हुआ है। वहीं, खेतों में खड़ी और कटाई के बाद रखी गई धान की फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। अचानक बदले मौसम से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि पहले फसल तैयार करने में भारी लागत लगती है और अब मंडियों में पहुंचने के बाद बारिश से नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।
देर रात हुई बारिश से मंडियों में जलभराव
पानीपत में गुरुवार देर रात से रुक-रुककर बारिश होती रही। कई इलाकों में तेज हवाएं भी चलीं। बारिश के कारण अनाज मंडियों में रखे धान को सुरक्षित रखने की व्यवस्था प्रभावित हुई।मौसम संबंधी आंकड़ों के अनुसार, पानीपत तहसील में 21 मिलीमीटर, इसराना और बापौली में 10-10 मिलीमीटर, समालखा में 9 मिलीमीटर तथा मतलौडा में 7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।बारिश के कारण मंडियों के खुले स्थानों पर पानी जमा हो गया। जिन किसानों और आढ़तियों ने धान को सुखाने के लिए खुले में रखा था, उन्हें सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा।धान की बोरियां भी पानी में भीग गईं। कई जगह किसानों और आढ़तियों ने तिरपाल की मदद से फसल को बचाने की कोशिश की, लेकिन अचानक हुई बारिश के कारण पूरी उपज को सुरक्षित नहीं रखा जा सका।
किसानों को सता रहा आर्थिक नुकसान का डर
बारिश के कारण धान की फसल में नमी बढ़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि धान समय पर नहीं सूखा, तो उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।धान की सरकारी खरीद में नमी की निर्धारित सीमा महत्वपूर्ण होती है। सामान्यतः निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अंतर्गत 17 प्रतिशत तक नमी स्वीकार की जाती है।बारिश के कारण यदि धान में नमी निर्धारित सीमा से अधिक हो जाती है, तो किसानों को उसे दोबारा सुखाना पड़ सकता है। इससे बिक्री में देरी होने की आशंका है।किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि फसल को खेत से मंडी तक पहुंचाने के बाद भी उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
पानीपत के किसान रामफल और कर्म सिंह ने भी बारिश के कारण धान की कटाई, खरीद और उठान की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात कही है। किसानों को आशंका है कि फसल की गुणवत्ता खराब होने से उन्हें उचित कीमत मिलने में परेशानी हो सकती है।
मंडी की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल
बारिश के बाद अनाज मंडियों में धान को सुरक्षित रखने की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।मंडी में बड़ी मात्रा में फसल खुले में रखी होने के कारण बारिश से नुकसान की आशंका पहले से बनी हुई थी।किसानों का कहना है कि यदि धान का समय पर उठान और सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाता, तो नुकसान की आशंका कम हो सकती थी।प्रशासन की ओर से तिरपाल और उठान की व्यवस्था किए जाने के दावे सामने आए थे, लेकिन तेज बारिश के दौरान ये इंतजाम पर्याप्त साबित नहीं हुए।
मंडी प्रधान दिनेश भोकर और मार्केट कमेटी के उपाध्यक्ष बलवान शर्मा से भी स्थानीय मीडिया ने हालात को लेकर बातचीत की है। हालांकि, उनके विस्तृत प्रत्यक्ष बयान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।इस बीच किसानों और आढ़तियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती भीगे हुए धान को सुरक्षित रखना और उसकी बिक्री सुनिश्चित करना है।
खेतों में खड़ी फसल को भी नुकसान की आशंका
बारिश का असर केवल अनाज मंडियों तक सीमित नहीं है। खेतों में खड़ी धान की फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।जिन किसानों की फसल कटाई के लिए तैयार थी, उनके सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है।तेज हवा और बारिश के कारण धान के पौधे जमीन पर गिर सकते हैं। इससे कटाई मुश्किल हो जाती है और फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, जिन किसानों ने धान की कटाई कर फसल खेत में रखी थी, उन्हें भी नुकसान का डर सता रहा है।यदि खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहता है, तो कटी हुई फसल खराब हो सकती है। इसके अलावा खेतों में अधिक नमी होने के कारण कटाई की मशीनों को चलाने में भी परेशानी हो सकती है।किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि धान की कटाई के बाद कई क्षेत्रों में गेहूं और अन्य रबी फसलों की बुवाई की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
धान की खरीद और उठान में देरी बनी समस्या
हरियाणा की मंडियों में धान की खरीद और उठान की रफ्तार को लेकर पहले से सवाल उठ रहे हैं।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य की मंडियों में 42.2 लाख मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई थी। इसमें से लगभग 37.5 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका था, जबकि करीब 29.2 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ था।इससे स्पष्ट होता है कि राज्य की मंडियों में बड़ी मात्रा में धान अभी भी मौजूद था।बारिश के दौरान खुले में पड़े धान को सुरक्षित रखना किसानों, आढ़तियों और संबंधित एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
किसानों ने की नुकसान का आकलन कराने की मांग
बारिश के कारण फसलों को हुए संभावित नुकसान को लेकर किसान संगठनों ने प्रशासन से उचित आकलन और राहत की मांग उठाई है।किसानों का कहना है कि मंडियों में फसल बेचने के लिए पहुंचने के बाद यदि धान बारिश से खराब होता है, तो इसकी जिम्मेदारी और नुकसान की भरपाई को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।इसके अलावा खेतों में प्रभावित फसल का सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का पता लगाने की जरूरत भी बताई जा रही है।किसान संगठनों की ओर से विशेष गिरदावरी और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग भी सामने आई है।
मौसम में बदलाव से बढ़ी परेशानी
पानीपत के साथ हरियाणा के अन्य जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। कुरुक्षेत्र, झज्जर और आसपास के इलाकों में मौसम बदलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई।मौसम में आई ठंडक ने जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं किसानों के लिए यह बारिश चिंता का कारण बन गई है।फिलहाल किसान और आढ़ती भीगी हुई फसल को सुखाने तथा बची हुई उपज को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।बारिश से हुए वास्तविक आर्थिक नुकसान का पता फसल की स्थिति और संबंधित विभागों के आकलन के बाद ही चल सकेगा।इस बीच किसानों की मांग है कि अनाज मंडियों में धान का उठान तेज किया जाए, पर्याप्त तिरपाल और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था हो तथा प्रभावित फसल को लेकर समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
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