मंडी। हिमाचल प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें प्रयोगों के माध्यम से सीखने का अवसर देने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के 50 स्कूलों के विद्यार्थियों तक विज्ञान और तकनीक से जुड़ी व्यावहारिक शिक्षा पहुंचाई जाएगी। खास बात यह है कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों को उन वैज्ञानिक प्रयोगों और उपकरणों से परिचित कराना है, जिन तक उनकी सामान्य कक्षाओं में पहुंच सीमित हो सकती है।
पांच जिलों के स्कूलों तक पहुंचेगा कार्यक्रम
‘साइंस ऑन व्हील्स’ पहल के तहत मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के स्कूलों को शामिल किया गया है। कार्यक्रम को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) का समर्थन प्राप्त है। इसे IIT मंडी, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी और इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड्स (IDYM) फाउंडेशन के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।इस पहल के अंतर्गत छठी से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को विज्ञान की अवधारणाएं प्रयोगों और गतिविधियों के जरिये समझाई जाएंगी। इसका लक्ष्य केवल किताबों में पढ़ाए जाने वाले सिद्धांतों तक सीमित न रहकर बच्चों को वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
हर स्कूल में छह घंटे की विशेष गतिविधियां
कार्यक्रम के तहत प्रत्येक स्कूल में लगभग छह घंटे का विशेष शैक्षणिक सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें विद्यार्थियों को चार प्रमुख क्षेत्रों में सीखने का अवसर मिलेगा—अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सतत विकास और जल शुद्धिकरण।इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोग करके समझ सकेंगे। उदाहरण के लिए, जल शुद्धिकरण से जुड़े मॉडल के जरिये पानी को साफ करने की प्रक्रिया समझाई जाएगी। वहीं, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़ी गतिविधियां बच्चों को आधुनिक विज्ञान तथा तकनीकी नवाचारों से परिचित कराएंगी।इस तरह की व्यावहारिक शिक्षा विद्यार्थियों में सवाल पूछने, समस्याओं का समाधान खोजने और नए प्रयोग करने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकती है।
IIT मंडी परिसर में हुआ शुभारंभ
इस पहल का हिमाचल प्रदेश में औपचारिक शुभारंभ 17 अक्टूबर 2026 को IIT मंडी परिसर स्थित कैंपस स्कूल में किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीधर बेहरा ने किया।शुभारंभ के दौरान हाइड्रो रॉकेट का लाइव प्रदर्शन किया गया। इस प्रयोग के माध्यम से विद्यार्थियों को बल, दबाव और गति जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यवहार में समझने का अवसर मिला। विद्यार्थियों ने प्रदर्शन में रुचि दिखाई और विज्ञान को अधिक रोचक तरीके से समझने का अनुभव प्राप्त किया।प्रोफेसर बेहरा ने विज्ञान के प्रति बच्चों में जिज्ञासा और रुचि विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
छत्तीसगढ़ और पंजाब में भी चल चुका है कार्यक्रम
‘साइंस ऑन व्हील्स’ पहल को हिमाचल प्रदेश में शुरू करने से पहले छत्तीसगढ़ और पंजाब में भी संचालित किया गया था। इन दोनों राज्यों में 70 स्कूलों के 7,500 से अधिक विद्यार्थियों तक कार्यक्रम पहुंचने की जानकारी दी गई है।अब हिमाचल के 50 स्कूलों को इसमें शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम का संचालन प्लाक्षा यूनिवर्सिटी की डॉ. रुचा जोशी के नेतृत्व में किया जा रहा है। इसमें IIT मंडी और IDYM फाउंडेशन की टीम भी सहयोग दे रही है। IDYM फाउंडेशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़े शैक्षणिक कार्यक्रमों में भी भागीदारी करता है।
ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेगा विज्ञान सीखने का अवसर
हिमाचल प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए आधुनिक प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक उपकरणों तक पहुंच सीमित हो सकती है। ऐसे में मोबाइल विज्ञान शिक्षा कार्यक्रम बच्चों को उनके स्कूल में ही प्रयोग आधारित सीखने का अवसर उपलब्ध करा सकता है।इस पहल से विद्यार्थियों को विज्ञान के कठिन सिद्धांतों को सरल गतिविधियों के माध्यम से समझने, तार्किक सोच विकसित करने और तकनीक के व्यावहारिक उपयोग जानने में मदद मिलने की उम्मीद है।‘साइंस ऑन व्हील्स’ का लक्ष्य विज्ञान को कक्षा की किताबों से बाहर लाकर विद्यार्थियों के वास्तविक अनुभव का हिस्सा बनाना है। हिमाचल के 50 स्कूलों तक पहुंचने की यह योजना बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा, रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।