शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड लॉन्च किया। इस पहल का उद्देश्य चंबा जिले के दुर्गम जनजातीय क्षेत्र पांगी में प्राकृतिक तरीके से उगाए जाने वाले सेबों को अलग पहचान दिलाना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नए ब्रांड से पांगी के सेबों की पहचान मजबूत होगी और स्थानीय किसानों को अपनी उपज के विपणन में मदद मिलेगी।
पांगी बना प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि पांगी उपमंडल को हिमाचल प्रदेश का पहला ‘प्राकृतिक खेती उपमंडल’ घोषित किया गया है। सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना और धीरे-धीरे इसे रसायन-मुक्त कृषि क्षेत्र के रूप में विकसित करना है।इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और क्षेत्र के निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों को बाजार में विशिष्ट पहचान मिलने पर किसानों को अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।
370 हेक्टेयर में होती है सेब की खेती
पांगी क्षेत्र में लगभग 370 हेक्टेयर भूमि पर सेब की खेती की जाती है। यहां सेब के 1.04 लाख से अधिक पौधे हैं। इस सीजन में करीब 35,000 पेटियों यानी लगभग 550 मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।पांगी की भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय जलवायु सेब उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। अब सरकार इस उपज को अलग ब्रांड के तहत बाजार तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है, ताकि क्षेत्र के किसानों की पहचान दूसरे सेब उत्पादक इलाकों से अलग स्थापित हो सके।
पहले कुल्लू और किन्नौर के नाम से बिकते थे सेब
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक पांगी में उगाए जाने वाले सेब घाटी के बाहर अक्सर ‘कुल्लू एप्पल’ या ‘किन्नौर एप्पल’ के नाम से बेचे जाते थे। इसके कारण पांगी की अपनी उपज को स्वतंत्र पहचान नहीं मिल पाती थी।‘पांगी एप्पल’ ब्रांड शुरू होने से इस समस्या को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अलग नाम से बाजार में पहुंचने पर ग्राहकों को सेब के उत्पादन क्षेत्र की जानकारी मिल सकेगी और पांगी के किसानों की पहचान भी मजबूत होगी।
किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर मिलेंगे कार्टन
नई ब्रांडिंग पहल के तहत सेब की पैकिंग के लिए 20 किलोग्राम और 10 किलोग्राम क्षमता वाले विशेष कार्टन पेश किए गए हैं। ये कार्टन किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जाएंगे।विशेष पैकेजिंग से उत्पाद की अलग पहचान बनाने, उसकी सुरक्षित ढुलाई और बाजार में बेहतर प्रस्तुति में मदद मिल सकती है। इससे किसानों को अपनी उपज को व्यवस्थित तरीके से मंडियों और अन्य बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
6,300 किसान परिवारों की आजीविका मजबूत करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि ‘पांगी एप्पल’ पहल राज्य सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर पांगी को प्रदेश का पहला रसायन-मुक्त उपमंडल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।इस पहल से लगभग 6,300 किसान परिवारों को लाभ पहुंचाने की उम्मीद है। बेहतर विपणन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग से स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही क्षेत्र में कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।सरकार का उद्देश्य पांगी के प्राकृतिक रूप से उगाए गए सेबों को बाजार में अलग पहचान दिलाना और किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए अनुकूल व्यवस्था तैयार करना है।