हिमाचल में स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली में बदलाव की तैयारी, सरकार ने गठित की 12 सदस्यीय समिति

Update: 2026-07-29 11:35 GMT

हिमाचल प्रदेश सरकार: सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में लागू स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली में संशोधन की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इस व्यवस्था की समीक्षा और इसमें जरूरी बदलावों के सुझाव देने के लिए सरकार ने 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति सभी शिक्षक संगठनों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा करने के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग के अनुसार, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली की अध्यक्षता में गठित इस समिति का उद्देश्य स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली के क्रियान्वयन की समीक्षा करना है। समिति यह देखेगी कि प्राथमिक विद्यालयों में इस व्यवस्था को लागू करने के बाद शिक्षकों और विद्यार्थियों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और इसमें किस तरह के सुधार किए जा सकते हैं।

स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली को सरकारी स्कूलों में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसके तहत आसपास के छोटे विद्यालयों को एक कॉम्प्लेक्स के रूप में जोड़कर शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर कई शिक्षक संगठनों ने व्यावहारिक परेशानियों का मुद्दा उठाया था। शिक्षकों का कहना था कि कई क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों और स्कूलों की दूरी के कारण इसके संचालन में कठिनाइयां आ रही हैं।

समिति के गठन का निर्णय 25 जुलाई को मुख्यमंत्री और हिमाचल प्रदेश प्राइमरी टीचर फेडरेशन के बीच हुई बैठक के बाद लिया गया। बैठक में शिक्षकों ने स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली से जुड़ी अपनी समस्याएं और सुझाव सरकार के सामने रखे थे। इसके बाद सरकार ने सभी पक्षों की राय लेने के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया।

गठित समिति में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। समिति के अध्यक्ष निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली होंगे। इसके अलावा अतिरिक्त निदेशक बीआर शर्मा, संयुक्त नियंत्रक वित्त एवं लेखा तथा उपनिदेशक स्कूल शिक्षा शांता चौहान को भी जिम्मेदारी दी गई है। शांता चौहान समिति की सदस्य सचिव होंगी।

समिति में हिमाचल प्रदेश न्यू टीचर्स एसोसिएशन, प्राइमरी टीचर फेडरेशन, प्रिंसिपल एसोसिएशन, स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन, राजकीय अध्यापक संघ, टीजीटी साइंस, टीजीटी आर्ट्स और सीएंडवी फेडरेशन के प्रतिनिधियों को सदस्य बनाया गया है। सरकार का प्रयास है कि सभी शिक्षक संगठनों की राय लेकर ऐसी नीति तैयार की जाए, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों को लाभ मिल सके।

समिति की पहली बैठक 5 अगस्त को आयोजित होगी। इस बैठक में स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली के मौजूदा स्वरूप, इसके प्रभाव, प्राथमिक विद्यालयों में आने वाली चुनौतियों और संभावित संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके बाद समिति अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।

इधर, स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ का विरोध भी जारी है। प्राथमिक शिक्षक संघ का क्रमिक अनशन बुधवार को चौथे दिन भी जारी रहा। इस दौरान मंडी जिला अध्यक्ष बाबूराम कौंडल, महासचिव अतुल लखनपाल, मुकेश पवार, चंद्रमणि ठाकुर और विजय कुमार क्रमिक अनशन पर बैठे।

शिक्षक संघ लंबे समय से इस प्रणाली में बदलाव की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि नीति बनाते समय जमीनी स्तर की समस्याओं और शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अब सरकार द्वारा गठित समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह सभी पक्षों की बात सुनकर व्यावहारिक समाधान सुझाएगी।

शिक्षा विभाग का मानना है कि समिति की रिपोर्ट के बाद स्कूल कॉम्प्लेक्स प्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, संसाधनों का सही उपयोग करना और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में समिति की सिफारिशों के आधार पर हिमाचल प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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