हिमाचल में प्राथमिक शिक्षकों का आंदोलन तेज, 25 मांगों को लेकर शिमला में जुटेंगे शिक्षक
शिमला: हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। अपनी मांगों के समर्थन में संघ की ओर से शुरू की गई पदयात्रा शनिवार को राजधानी शिमला पहुंच गई। संघ ने सरकार से मांगों पर ठोस निर्णय लेने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। रविवार को शिमला के चौड़ा मैदान में संघ की ओर से बड़ी रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर से प्राथमिक शिक्षक भाग लेंगे।
संघ की यह पदयात्रा 11 जुलाई को कांगड़ा जिले के प्रसिद्ध बगलामुखी मंदिर से शुरू हुई थी। कई दिनों की यात्रा के बाद शिक्षक शिमला पहुंचे और यहां पहुंचकर उन्होंने सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार की ओर से अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
25 मांगों को लेकर संघर्ष
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने अपनी मांगों की सूची में कुल 25 मुद्दों को शामिल किया है। इनमें सबसे प्रमुख मांग स्कूल काम्पलेक्स प्रणाली को समाप्त करने की है। संघ का कहना है कि यह व्यवस्था प्राथमिक शिक्षा के मूल ढांचे को प्रभावित कर रही है और इससे छोटे विद्यालयों के संचालन में कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो रही हैं।
शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुराने ढांचे को बनाए रखा जाए और शिक्षकों से जुड़े सभी लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाए। संघ का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
सरकार पर लगाए शिक्षा व्यवस्था कमजोर करने के आरोप
शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में प्राथमिक शिक्षा के लिए जो मजबूत ढांचा तैयार किया गया था, उसे वर्तमान सरकार कमजोर कर रही है।
रमेश शर्मा ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी राज्य की शिक्षा व्यवस्था की नींव होती है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों से चर्चा के बाद किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में लिए जा रहे कई फैसले प्राथमिक विद्यालयों की मूल भावना के विपरीत हैं।
स्कूल काम्पलेक्स प्रणाली का विरोध
संघ अध्यक्ष ने स्कूल काम्पलेक्स प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 15 से 20 प्राथमिक विद्यालयों को एक वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य के अधीन लाने की योजना शिक्षा सुधार नहीं है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था प्राथमिक विद्यालयों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को प्रभावित करेगी और इससे शिक्षकों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जेबीटी (जूनियर बेसिक टीचर) के लगभग पांच हजार रिक्त पदों को नहीं भरने की रणनीति का हिस्सा है। संघ का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक पद खाली हैं, जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सरकार को इन पदों को जल्द भरना चाहिए ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।
शिक्षकों ने सरकार से मांगा समाधान
प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि वह सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका सीधा संबंध प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है।
शिक्षकों ने सरकार से अपील की है कि आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकाला जाए। संघ का कहना है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
चौड़ा मैदान में होगी बड़ी रैली
रविवार को शिमला के चौड़ा मैदान में होने वाली रैली को लेकर संघ ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से शिक्षक पहुंचेंगे। संघ का दावा है कि बड़ी संख्या में शिक्षक इसमें शामिल होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखेंगे।
रैली के दौरान शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करेंगे। साथ ही, भविष्य की आंदोलन की रणनीति पर भी फैसला लिया जा सकता है।
प्राथमिक शिक्षा के भविष्य पर उठे सवाल
शिक्षक संघ के आंदोलन ने प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। एक ओर सरकार शिक्षा में सुधार और बेहतर प्रबंधन की बात कर रही है, वहीं शिक्षक संगठन इन बदलावों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं।
अब सभी की नजर रविवार को होने वाली रैली और सरकार की प्रतिक्रिया पर है। यदि सरकार और शिक्षक संघ के बीच बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में संघर्ष आगे बढ़ने की संभावना है।
फिलहाल हिमाचल में प्राथमिक शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लामबंद हैं और सरकार से जल्द निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।