मेडिकल विशेषज्ञों ने लोगों, खासकर माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को चोटों से बचाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें। पटाखों, दीयों, मोमबत्तियों और आग के अन्य स्रोतों से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि थोड़ी सी लापरवाही से जीवन भर रहने वाले जलने के घाव हो सकते हैं। सोलन के वरिष्ठ सर्जन डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया, "हर साल दिवाली के दौरान हिमाचल प्रदेश के अस्पतालों में जलने (बर्न) के मरीज आते हैं। जो घटना अक्सर उत्साह या थोड़ी सी लापरवाही से शुरू होती है, वह एक मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है। इसके शारीरिक और मानसिक परिणाम जीवन भर रह सकते हैं।"
साल 2025 में पूरे राज्य में पटाखों से जुड़ी कई चोटों के मामले सामने आए। कांगड़ा से मिली रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 62 लोगों को ऐसी चोटों के लिए मेडिकल मदद लेनी पड़ी। वहीं, मंडी जिले के जोगिंदरनगर में 10 लोग घायल हुए, जिनमें से चार को गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी। इसके अलावा, दिवाली के दौरान पूरे राज्य में आग लगने की 47 घटनाएं दर्ज की गईं। डॉ. अग्रवाल ने कहा, "जलने की चोटें हमेशा उतनी मामूली नहीं होतीं जितनी दिखती हैं। ये त्वचा की ऊपरी परत के मामूली जलने से लेकर, अंदरूनी ऊतकों (tissues) तक को नुकसान पहुंचाने वाले गहरे घाव तक हो सकती हैं। पटाखे का अचानक फटना, कपड़ों पर चिंगारी गिरना या कपड़ों में आग लगना, कुछ ही सेकंड में गंभीर चोट का कारण बन सकता है।"
उन्होंने आगे कहा, "उंगलियों, पैर की उंगलियों, हाथों या जोड़ों पर लगी मामूली सी जलन को भी कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर घाव ठीक से न भरे, तो वहां निशान (scar) बन सकते हैं या त्वचा सिकुड़ सकती है (contractures)। इससे प्रभावित अंगों की हलचल सीमित हो सकती है और कभी-कभी स्थायी विकृति (deformity) भी आ सकती है।" हालांकि बचाव के तरीकों में सुधार हुआ है, लेकिन बच्चे अभी भी सबसे ज्यादा खतरे में हैं। उनका उत्साह, जिज्ञासा और पटाखों से जुड़े खतरों के बारे में जानकारी न होना खतरनाक साबित हो सकता है। बुजुर्गों और चलने-फिरने में सीमित लोगों को भी विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
विशेषज्ञों का जोर है कि तुरंत प्राथमिक उपचार (first aid) देने से जलने की गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रभावित हिस्से को लगभग 20 मिनट तक ठंडे बहते नल के पानी के नीचे रखना चाहिए। बर्फ, टूथपेस्ट, घी, तेल या अन्य घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए। अगर जले हुए हिस्से के पास कपड़े, गहने या अन्य चीजें हैं, तो उन्हें हटा देना चाहिए (बशर्ते वे त्वचा से चिपके न हों)। इसके बाद, घाव को किसी साफ और मुलायम पट्टी से ढीले ढंग से ढक देना चाहिए। ध्यान रहे कि छाले (blisters) को फोड़ना नहीं चाहिए। छोटी-मोटी जलन या जलने के मामलों में भी किसी मेडिकल सेंटर पर जाकर जांच करानी चाहिए, खासकर तब जब यह चेहरे, हाथों, पैरों, जननांगों या जोड़ों पर हुआ हो, या फिर छाले पड़ गए हों या बहुत तेज़ दर्द हो रहा हो। अगर जलन गहरी है, शरीर के बड़े हिस्से पर है या शरीर के किसी अंग के चारों ओर है, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
राज्य भर के अस्पतालों में जलने से जुड़े मामले आने शुरू हो गए हैं, क्योंकि त्योहार से कुछ दिन पहले ही लोग पटाखे फोड़ने लगते हैं। विशेषज्ञों ने कहा, "माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे किसी बड़े की देखरेख में ही पटाखे फोड़ें। पटाखे खुली जगह पर फोड़ने चाहिए, जहाँ आस-पास कोई इमारत, गाड़ी या आग पकड़ने वाली चीज़ें न हों। ढीले-ढाले सिंथेटिक कपड़े पहनने से बचें और अपने पास पानी या रेत से भरी बाल्टी तैयार रखें। इस्तेमाल किए गए पटाखों को तुरंत न छुएं और न ही उन्हें दोबारा जलाने की कोशिश करें।"