चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए। हादसा चुराह सब-डिविजन के बैरागढ़ इलाके के पास चालुंज मोड़ पर हुआ, जहां एक निजी बस सड़क से फिसलकर करीब 100 फीट नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

जानकारी के अनुसार, निजी बस बैरागढ़ से चंबा की ओर जा रही थी। हादसा सुबह करीब 7.15 बजे बैरागढ़-तिस्सा रोड पर हुआ। बताया जा रहा है कि यह मार्ग चुराह घाटी का करीब 27 किलोमीटर लंबा पहाड़ी रास्ता है, जिसे अपनी संकरी सड़क और खड़ी ढलानों के कारण काफी जोखिम भरा माना जाता है।

अचानक सड़क से फिसली बस

प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक, बस चालुंज मोड़ के पास पहुंची और अचानक सड़क से फिसल गई। इसके बाद बस करीब 100 फीट नीचे दूसरी सड़क पर जा गिरी। बस के नीचे गिरते ही उसमें सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई।

हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे और बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव दल को भी मौके पर बुलाया गया। घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

ड्राइवर और कंडक्टर की भी मौत

हादसे में जान गंवाने वालों में बस का ड्राइवर और कंडक्टर भी शामिल हैं। बस में सवार अन्य यात्रियों में से भी कई लोगों की हादसे में मौत हुई। दुर्घटना में कुल सात लोगों की जान चली गई, जबकि 11 यात्री घायल हुए हैं।

घायलों में कुछ की हालत गंभीर होने की स्थिति में उन्हें बेहतर इलाज के लिए अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किए जाने की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घायलों के इलाज और जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हैं।

खतरनाक माना जाता है बैरागढ़-तिस्सा मार्ग

जिस सड़क पर यह हादसा हुआ, वह चुराह घाटी के दुर्गम इलाकों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। बैरागढ़-तिस्सा रोड का संबंधित हिस्सा करीब 27 किलोमीटर लंबा पहाड़ी रास्ता है। यह मार्ग संकरा होने के साथ-साथ कई स्थानों पर खड़ी ढलानों से घिरा हुआ है।

पहाड़ी इलाकों में सड़क की चौड़ाई कम होने और एक तरफ गहरी खाई होने के कारण वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है। मौसम और सड़क की स्थिति में बदलाव होने पर जोखिम और बढ़ जाता है।

यह मार्ग ऊंचाई पर स्थित सच पास की ओर जाने वाले रास्ते का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सच पास हिमाचल प्रदेश के चंबा क्षेत्र का प्रसिद्ध ऊंचाई वाला दर्रा है और इसके आसपास का इलाका भौगोलिक दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

हादसे के कारणों की जांच

प्रारंभिक जानकारी के आधार पर बस के सड़क से फिसलने की बात सामने आई है, लेकिन हादसा वास्तव में किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी विस्तृत जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। पुलिस और प्रशासन की ओर से दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

जांच में सड़क की स्थिति, वाहन की तकनीकी स्थिति, चालक की स्थिति और हादसे से पहले बस की गति समेत विभिन्न पहलुओं को देखा जा सकता है। यह भी पता लगाया जाएगा कि हादसे के समय सड़क पर किसी तरह की बाधा या अन्य परिस्थितियां तो मौजूद नहीं थीं।

स्थानीय लोगों ने शुरू किया बचाव अभियान

दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य में जुट गए। पहाड़ी क्षेत्र में हादसा होने के कारण दुर्घटनास्थल तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार घायलों को बस से बाहर निकालने में मदद की।

हादसे के बाद प्रशासन की ओर से भी राहत और बचाव कार्य को तेज किया गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई। दुर्घटना के कारण कुछ समय के लिए इलाके में तनाव और चिंता का माहौल रहा।

यात्रियों के परिवारों में मातम

हादसे में सात लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद उनके परिवारों में मातम छा गया। दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाले सड़क हादसे अक्सर परिवारों के लिए बड़ी त्रासदी बन जाते हैं, क्योंकि कई बार दुर्घटनास्थल तक पहुंचना और तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना मुश्किल होता है।

मृतकों के परिजनों को घटना की सूचना दी जा रही है और प्रशासन की ओर से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की जा रही है। घायलों के परिजन भी अस्पताल पहुंच रहे हैं और अपने करीबियों की स्थिति जानने की कोशिश कर रहे हैं।

पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा फिर सवालों में

चंबा का यह हादसा एक बार फिर हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी सड़कों पर यातायात सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है। राज्य के कई इलाकों में सड़कें पहाड़ों को काटकर बनाई गई हैं और इनके दोनों ओर गहरी ढलान या खाई होती है। ऐसे मार्गों पर मामूली चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी सड़कों पर वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखना, मोड़ों पर अतिरिक्त सावधानी बरतना और वाहन की तकनीकी स्थिति की नियमित जांच बेहद जरूरी है। वहीं, प्रशासन के लिए भी सड़क सुरक्षा उपायों, सुरक्षा अवरोधों और संवेदनशील मोड़ों की पहचान पर लगातार काम करना महत्वपूर्ण है।

फिलहाल चंबा के चालुंज मोड़ पर हुए इस हादसे में सात लोगों की मौत और 11 लोगों के घायल होने से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है और घायलों के उपचार पर ध्यान दिया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों और इसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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