जम्मू: जम्मू-कश्मीर की लोक संस्कृति और संगीत की समृद्ध परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान मिला है। प्रदेश के कला और संगीत क्षेत्र में लंबे समय से योगदान देने वाले कलाकारों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया।
इस सम्मान के माध्यम से जम्मू-कश्मीर की लोक परंपराओं, लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को देशभर में नई पहचान मिली है। समारोह में लोक संगीत और लोक नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया।
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध लोक कलाकार रोमालो राम को लोक संगीत एवं लोक नृत्य के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। रोमालो राम ने वर्षों तक प्रदेश की पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने का काम किया है।
इसके अलावा प्रसिद्ध गायिका सीमा अनिल सहगल को भी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपनी मधुर आवाज और संगीत के प्रति समर्पण के लिए पहचान बनाने वाली सीमा अनिल सहगल ने जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सम्मान समारोह में कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए और उनकी कला साधना की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत बनाने में कलाकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार देश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मानों में से एक माना जाता है। यह पुरस्कार संगीत, नृत्य, रंगमंच और लोक कलाओं के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को प्रदान किया जाता है।
जम्मू-कश्मीर अपनी विविध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यहां के लोक गीत, लोक नृत्य और पारंपरिक संगीत सदियों पुरानी संस्कृति को दर्शाते हैं। इन कलाओं को जीवित रखने में स्थानीय कलाकारों का योगदान अहम रहा है।
रोमालो राम ने जम्मू-कश्मीर के लोक संगीत और नृत्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने पारंपरिक लोक विधाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ मंचों के माध्यम से इन्हें व्यापक पहचान दिलाई।
वहीं, सीमा अनिल सहगल ने गायन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर की संगीत परंपराओं को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है।
कलाकारों को मिले इस सम्मान से जम्मू-कश्मीर के कला जगत में खुशी का माहौल है। सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इसे प्रदेश की लोक विरासत के लिए गौरव का क्षण बताया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे सम्मान लोक कलाओं को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और पारंपरिक कलाओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
जम्मू-कश्मीर में लोक संगीत और नृत्य की कई विधाएं प्रचलित हैं, जिनमें स्थानीय इतिहास, परंपराओं और सामाजिक जीवन की झलक दिखाई देती है। कलाकारों के प्रयासों से इन विधाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान मिल रही है।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिलने के बाद रोमालो राम और सीमा अनिल सहगल ने भी इसे अपनी कला यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की संस्कृति और लोक कलाकारों का सम्मान है।
प्रदेश के कला प्रेमियों ने उम्मीद जताई है कि इस तरह के सम्मान से जम्मू-कश्मीर की लोक संस्कृति को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, युवा कलाकार भी पारंपरिक कला और संगीत के क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रेरित होंगे।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस सम्मान समारोह ने एक बार फिर देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को सामने रखा। जम्मू-कश्मीर के कलाकारों को मिला यह सम्मान प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।