श्रीनगर: कश्मीर विश्वविद्यालय (KU) के 'शेख-उल-आलम सेंटर फॉर मल्टीडिसिप्लिनरी स्टडीज' (SACMS) ने साहित्य अकादमी के सहयोग से मुख्य परिसर में 'एन इवनिंग विद अ क्रिटिक' (एक आलोचक के साथ एक शाम) नामक एक साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कश्मीरी साहित्य के जाने-माने आलोचक इक़बाल नाज़की शामिल हुए। इस कार्यक्रम ने साहित्यिक रचनाओं की व्याख्या करने और कश्मीरी साहित्य के व्यापक सांस्कृतिक व सामाजिक संदर्भों को समझने में 'साहित्यिक आलोचना' की भूमिका पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान किया।
अपनी साहित्यिक यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए, इक़बाल नाज़की ने बताया कि साहित्यिक कृतियों को समझने और उनके गहरे अर्थों तक पहुँचने के लिए आलोचनात्मक दृष्टि कितनी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "साहित्यिक आलोचना हमें किसी रचना की ऊपरी परत से परे देखने और उसमें निहित विचारों, अनुभवों तथा सांस्कृतिक वास्तविकताओं को समझने में मदद करती है।"
इस दौरान कश्मीरी साहित्यिक परंपराओं की समृद्धि पर विशेष जोर दिया गया और साहित्यिक आलोचना तथा विद्वतापूर्ण संवाद की एक जीवंत संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बात की गई। SACMS के अध्यक्ष प्रो. आदिल अमीन काक ने कहा कि इस तरह के साहित्यिक संवाद आलोचनात्मक चिंतन से जुड़ने के अवसर पैदा करते हैं और छात्रों तथा विद्वानों को साहित्य को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. मो. ज़मान अज़ुर्दा ने की, जबकि प्रो. शाद रमज़ान ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कश्मीरी साहित्य और उसकी साहित्यिक परंपराओं की समझ को समृद्ध करने में साहित्यिक आलोचना के महत्व पर प्रकाश डाला। चर्चा में भाग लेने वालों में SACMS के 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' डॉ. सतीश विमल, प्रो. नूर अहमद बाबा, डॉ. मारूफ शाह, मोहम्मद अमीन भट और शकील-उर-रहमान शामिल थे। कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, छात्रों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। इस संवादात्मक सत्र ने प्रतिष्ठित वक्ताओं और उपस्थित श्रोताओं के बीच सार्थक विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।