बारामूला: बारामूला जिला प्रशासन ने रविवार को एक आदिवासी बहुल इलाके में उद्घाटन कार्यक्रम के साथ 'जनजातीय गौरव दिवस 2026' के पखवाड़े भर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की। इसके साथ ही, 1 नवंबर से 15 नवंबर तक पूरे जिले में आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला का आगाज हो गया। उद्घाटन कार्यक्रम में जिले के गतिविधि कैलेंडर को जारी किया गया। यहाँ एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें आदिवासी नायकों के योगदान, उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को दर्शाया गया। इसके अलावा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामुदायिक पहुंच से जुड़े कई आयोजन भी किए गए। इसमें शामिल विभागों ने पोषण, बचपन की देखभाल, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, समाज कल्याण, वन संरक्षण, कृषि और बागवानी से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की। इनका मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदायों के बीच सरकारी योजनाओं और उनके अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना था।
पहले दिन की गतिविधियों के तहत, ICDS विभाग ने अपने मैदानी कर्मचारियों के माध्यम से आदिवासी परिवारों तक पहुँचकर उन्हें पोषण और बचपन की देखभाल के बारे में जागरूक किया। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान चलाए। शिक्षा विभाग ने छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की और उन्हें आदिवासी नायकों तथा विरासत के बारे में जागरूक किया। समाज कल्याण, वन, कृषि और बागवानी विभागों ने भी कल्याणकारी योजनाओं, पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ कृषि और आजीविका के अवसरों के बारे में जानकारी प्रदर्शित करके अपना योगदान दिया।
युवा सेवा एवं खेल विभाग और 'माई भारत' (MY Bharat) ने युवाओं की भागीदारी और स्वयंसेवकों को जुटाने में मदद की। वहीं, जिला सूचना कार्यालय ने उद्घाटन कार्यक्रम की मीडिया कवरेज, प्रचार-प्रसार, ब्रांडिंग और दस्तावेजीकरण का समन्वय किया।
'जनजातीय गौरव दिवस' हर साल 15 नवंबर को 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इसका बहुत बड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। भारत सरकार ने 2021 में 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में घोषित किया था। इसका उद्देश्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के असाधारण योगदान और बलिदानों का सम्मान करना है, जिनके साहस, प्रतिरोध और आंदोलनों ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
यह अवसर केवल अतीत को याद करने का ही नहीं है, बल्कि भारत की सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक विविधता, परंपराओं, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक ताने-बाने को आकार देने में आदिवासी समुदायों के अमूल्य योगदान को मान्यता देने का भी है। इसका उद्देश्य आदिवासी नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों की उन कहानियों को मुख्यधारा में लाना है, जिनके योगदान को हमेशा वह पहचान नहीं मिली जिसके वे हकदार थे। साथ ही, यह आदिवासी समाजों के साहस, गरिमा और उनकी विशिष्ट पहचान का जश्न भी मनाता है।
दो सप्ताह तक चलने वाले ये आयोजन आदिवासी इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैं कि सरकारी कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुँचे। इसका व्यापक दृष्टिकोण केवल प्रतीकात्मक पहचान से आगे बढ़कर, आदिवासी समुदायों के सार्थक समावेश, सशक्तिकरण और समान विकास की दिशा में काम करना है, जबकि साथ ही उनकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को भी संरक्षित रखना है। इन आयोजनों का समापन 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के साथ होगा। इन दो सप्ताहों के दौरान विभिन्न विभागीय गतिविधियाँ, जागरूकता कार्यक्रम, सांस्कृतिक पहल और समुदाय तक पहुँचने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
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