सुरनकोट। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के सुरनकोट क्षेत्र में मवेशियों के अवैध परिवहन के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। सुरनकोट पुलिस स्टेशन की टीम ने 30 और 31 अक्टूबर 2026 को नियमित नाका चेकिंग अभियान के दौरान तीन संदिग्ध वाहनों को रोककर जांच की। इस दौरान मवेशियों के परिवहन से संबंधित नियमों के कथित उल्लंघन सामने आने पर पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस की इस कार्रवाई को पशुओं के अवैध परिवहन और पशु क्रूरता की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरनकोट पुलिस स्टेशन की टीम क्षेत्र में नियमित नाका चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान 30 अक्टूबर को पुलिसकर्मियों ने दो टाटा मोबाइल वाहनों को जांच के लिए रोका। वाहनों की तलाशी लेने पर उनमें कुल 10 मवेशी लदे हुए पाए गए। पुलिस ने जब वाहन चालकों से पशुओं के परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और अनुमति मांगी, तो वे जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आवश्यक अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सके।
पुलिस के मुताबिक, संबंधित वाहन चालक जिला मजिस्ट्रेट से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना मवेशियों का परिवहन कर रहे थे। इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए पुलिस ने संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की। सुरनकोट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इन धाराओं के अंतर्गत वैध आदेशों की अवहेलना और पशुओं के साथ क्रूरता से संबंधित आरोपों की जांच की जाएगी।
बताया जा रहा है कि पुलिस की कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं रही। 31 अक्टूबर को भी नाका चेकिंग के दौरान एक अन्य वाहन को रोका गया। इस तरह दो दिनों में कुल तीन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। हालांकि, 31 अक्टूबर को पकड़े गए तीसरे वाहन में कितने मवेशी मौजूद थे, वाहन का पंजीकरण नंबर क्या था और चालक की पहचान क्या है, इस संबंध में उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी में विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में बिना आवश्यक दस्तावेजों के पशुओं का परिवहन करने वालों के लिए सख्त संदेश गया है। अधिकारियों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मवेशियों का परिवहन निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही किया जाए। इसके साथ ही परिवहन के दौरान पशुओं की सुरक्षा और उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में परिवार अपनी आजीविका के लिए गाय, भैंस, भेड़, बकरी और अन्य पशुओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में पशुओं का एक स्थान से दूसरे स्थान तक परिवहन सामान्य गतिविधि है, लेकिन इसके लिए संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करना जरूरी होता है। बिना वैध अनुमति के पशुओं को ले जाने के मामलों में पुलिस परिस्थितियों के अनुसार जांच और कार्रवाई कर सकती है।
सुरनकोट जैसे पहाड़ी इलाकों में सड़क मार्ग से मवेशियों का परिवहन कई बार चुनौतीपूर्ण भी होता है। संकरे रास्तों, लंबी दूरी और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण पशुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। पशुओं को वाहनों में निर्धारित क्षमता और उपयुक्त व्यवस्था के अनुसार ले जाना जरूरी है, ताकि उन्हें चोट, अनावश्यक पीड़ा या अन्य नुकसान से बचाया जा सके।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 में पशुओं के साथ क्रूरता से जुड़े विभिन्न कृत्यों के संबंध में प्रावधान किए गए हैं। इनमें पशुओं को अनावश्यक कष्ट पहुंचाने और अनुचित परिस्थितियों में परिवहन करने जैसे मामलों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। वहीं, भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 लोक सेवक द्वारा विधिवत जारी आदेश की अवहेलना से संबंधित है। हालांकि, किसी विशेष मामले में इन धाराओं के तहत अपराध सिद्ध होगा या नहीं, यह जांच में सामने आने वाले तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
पुलिस की ओर से दर्ज किए गए तीनों मामलों में यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि पशुओं को कहां से लाया जा रहा था और उन्हें किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अतिरिक्त परिवहन का उद्देश्य, वाहन चालकों के पास उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित अनुमति की स्थिति भी जांच का विषय हो सकती है। फिलहाल इन बिंदुओं पर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
क्षेत्र में इस तरह की नाका चेकिंग का एक उद्देश्य सड़क मार्ग से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना भी है। वाहनों की नियमित जांच के दौरान पुलिस परिवहन संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कर सकती है। इससे नियमों का पालन करने वाले वाहन संचालकों और बिना आवश्यक अनुमति परिवहन करने वालों के बीच अंतर स्पष्ट करने में सहायता मिलती है।
इस मामले में पुलिस ने 30 अक्टूबर को पकड़े गए दोनों टाटा मोबाइल वाहनों में कुल 10 मवेशी मिलने की पुष्टि की है। वहीं, दो दिनों में तीन वाहन रोके जाने और तीन एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। तीसरे वाहन से संबंधित मवेशियों की संख्या और अन्य विवरण स्पष्ट नहीं होने के कारण कुल बरामद पशुओं की अंतिम संख्या बताना फिलहाल संभव नहीं है।
सुरनकोट पुलिस की इस कार्रवाई को पशुओं के अवैध परिवहन के खिलाफ जारी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि तीनों मामलों में परिवहन से जुड़े नियमों का किस स्तर पर उल्लंघन हुआ और संबंधित व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।
फिलहाल सुरनकोट पुलिस स्टेशन में दर्ज तीनों एफआईआर के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि बिना आवश्यक अनुमति के मवेशियों का परिवहन करने के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।