कश्मीर में बारिश का दौर जारी, बाढ़ का खतरा बढ़ा

Update: 2026-07-25 10:28 GMT

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में लगातार जारी बारिश ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को हुई बारिश के नए दौर ने घाटी में पिछले एक सप्ताह से चल रहे खराब मौसम को और लंबा खींच दिया है। लगातार बारिश के कारण कश्मीर घाटी में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है और लोगों को वर्ष 2014 की विनाशकारी बाढ़ की यादें फिर से सताने लगी हैं।

हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल 2014 जैसी गंभीर स्थिति का कोई तत्काल खतरा नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

एक सप्ताह से जारी है बारिश का सिलसिला

कश्मीर में पिछले करीब एक सप्ताह से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इस लगातार बारिश के कारण जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

बारिश के चलते कई जगहों पर सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हुआ और कई इलाकों में लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा।

शुक्रवार को बारिश की तीव्रता कुछ कम हुई थी, जिसके बाद झेलम नदी का जलस्तर स्थिर होने लगा था। इससे प्रशासन ने कुछ राहत महसूस की थी, लेकिन शनिवार सुबह से फिर शुरू हुई बारिश ने एक बार फिर सतर्कता बढ़ा दी है।

झेलम नदी के जलस्तर पर कड़ी निगरानी

कश्मीर में बाढ़ की स्थिति का आकलन करने के लिए झेलम नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, श्रीनगर के एक प्रमुख निगरानी केंद्र पर झेलम नदी का जलस्तर बाढ़ घोषित करने वाले स्तर से ऊपर बना हुआ है, लेकिन अभी खतरे के निशान से नीचे है।

अधिकारियों का कहना है कि नदी के जलस्तर में किसी भी अचानक वृद्धि को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

2014 की बाढ़ की यादें हुईं ताजा

लगातार बारिश के कारण घाटी के लोगों में वर्ष 2014 की विनाशकारी बाढ़ की यादें फिर से ताजा हो गई हैं। उस साल जम्मू-कश्मीर में आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया था। हजारों लोग प्रभावित हुए थे और कई इलाकों में लंबे समय तक सामान्य जीवन प्रभावित रहा था।

उस घटना के बाद से बारिश और बाढ़ की स्थिति को लेकर प्रशासन और आम लोग अधिक सतर्क रहते हैं। ऐसे में लगातार हो रही बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अभी घबराने जैसी स्थिति नहीं है।

प्रशासन ने बढ़ाई तैयारी

लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सक्रिय रखा है। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

इसके अलावा राहत और बचाव दलों को भी तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

सड़क संपर्क और जनजीवन पर असर

बारिश के कारण घाटी के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। कुछ इलाकों में जलभराव और भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग बाधित हुए हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश से मिट्टी कमजोर होने के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन ने यात्रियों को सावधानी बरतने और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने की सलाह दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन प्रशासन की निगरानी से उन्हें कुछ राहत मिली है।

मौसम विभाग की निगरानी जारी

मौसम विभाग की ओर से भी घाटी में मौसम की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में बारिश की स्थिति को देखते हुए आगे के फैसले लिए जाएंगे।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं। फिलहाल सबसे ज्यादा ध्यान झेलम नदी और अन्य जल स्रोतों के जलस्तर पर रखा जा रहा है।

सतर्क रहने की अपील

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। बारिश के दौरान नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है।

कश्मीर में जारी बारिश ने भले ही चिंता बढ़ाई है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। लगातार निगरानी और समय पर कदम उठाकर किसी भी बड़ी आपदा से बचने की कोशिश की जा रही है।

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