जम्मू। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ गई है। त्योहार की खुशियों में मिठास घोलने वाली मिठाइयां इस बार लोगों की सेहत के लिए चिंता का कारण भी बन सकती हैं। जम्मू संभाग में दूध, खोया, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने के बीच मिलावट की आशंका गहरा गई है। स्थानीय उत्पादन और बाजार की जरूरतों के बीच अंतर होने के कारण बाहरी राज्यों से बड़ी मात्रा में दूध और मावा मंगाया जा रहा है। ऐसे में संदिग्ध गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पादों की बिक्री को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, जम्मू संभाग में सामान्य दिनों में दूध की दैनिक खपत करीब 4.5 से 5 लाख लीटर बताई जाती है, जबकि स्थानीय उत्पादन लगभग 3.5 से 3.8 लाख लीटर के आसपास होने का अनुमान है। हालांकि, इन आंकड़ों की ताजा आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। सामान्य दिनों में दूध की कमी को पैकेज्ड दूध और बाहरी आपूर्ति के माध्यम से पूरा किया जाता है, लेकिन त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
दीपावली के अवसर पर मिठाई की दुकानों, होटलों, रेस्तरां और डेयरी प्रतिष्ठानों में दूध तथा खोए की खपत बढ़ जाती है। विशेष रूप से बर्फी, पेड़ा, कलाकंद, गुलाब जामुन और अन्य पारंपरिक मिठाइयों को तैयार करने में बड़ी मात्रा में मावे की आवश्यकता होती है। मांग अचानक बढ़ने पर दुकानदारों को अतिरिक्त आपूर्ति की जरूरत पड़ती है।
इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व बाजार में कम गुणवत्ता वाले या मिलावटी उत्पाद पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। दूध से तैयार होने वाले शुद्ध खोए की उत्पादन प्रक्रिया में समय और लागत दोनों लगते हैं। इसके विपरीत सस्ते पदार्थों की मिलावट करके तैयार किया गया नकली या घटिया मावा अधिक मुनाफा कमाने का माध्यम बन सकता है।
जम्मू के प्रमुख बाजारों में बाहरी क्षेत्रों से आने वाले मावे और अन्य डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि, बाहर से आने वाला प्रत्येक उत्पाद मिलावटी नहीं होता। किसी भी खेप को नकली या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित घोषित करने के लिए खाद्य सुरक्षा जांच और प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक हैं।
त्योहारी सीजन में मिलावट की आशंका को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने निगरानी अभियान भी चलाया है। विभाग की ओर से अक्टूबर में जारी जानकारी के अनुसार, विशेष अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में 274 निरीक्षण किए गए और खाद्य पदार्थों के 213 नमूने एकत्र किए गए। इनमें मिठाइयों, दूध, खोया, पनीर, घी तथा अन्य खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस अभियान का उद्देश्य त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप खाद्य पदार्थ पहुंचाना है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दुकानों और खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच के साथ उत्पादों के नमूने लेकर परीक्षण के लिए भेजे जाते हैं। जांच में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मिलावटी मावा स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खाद्य पदार्थों में अखाद्य रसायन, खराब गुणवत्ता वाली वसा या अन्य असुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल होने पर पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। दूषित खाद्य पदार्थों से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को अधिक परेशानी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिठाई खरीदते समय केवल उसके रंग और सजावट को देखकर गुणवत्ता का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। अत्यधिक चमकीले रंग, असामान्य गंध, खराब स्वाद या अनुचित भंडारण की स्थिति वाले खाद्य पदार्थों से सावधान रहना आवश्यक है। हालांकि, मिलावट की पहचान हमेशा देखकर, सूंघकर या चखकर नहीं की जा सकती। कई प्रकार की मिलावट की पुष्टि केवल प्रयोगशाला परीक्षण से ही संभव होती है।
उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे विश्वसनीय और खाद्य सुरक्षा पंजीकरण वाले प्रतिष्ठानों से ही मिठाई तथा डेयरी उत्पाद खरीदें। पैकेटबंद उत्पाद लेते समय निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि, सामग्री का विवरण और भंडारण संबंधी निर्देश अवश्य देखें। खुली मिठाइयों के मामले में दुकान की साफ-सफाई और उत्पादों को सुरक्षित तापमान पर रखने की व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है।
त्योहारी मौसम में मिठाई की बढ़ती बिक्री के कारण दुकानों में अधिक मात्रा में सामान तैयार किया जाता है। यदि तैयार उत्पादों को लंबे समय तक अनुचित तापमान पर रखा जाए, तो उनके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। दूध और मावे से बनी मिठाइयों में यह सावधानी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
जम्मू-कश्मीर में खाद्य सुरक्षा से संबंधित शिकायतों के लिए उपभोक्ता टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 104 का उपयोग कर सकते हैं। संदिग्ध खाद्य पदार्थ की बिक्री, खराब गुणवत्ता या असुरक्षित भंडारण की जानकारी संबंधित विभाग को दी जा सकती है। शिकायत करते समय दुकान का नाम, स्थान, खरीद की रसीद और उत्पाद के विवरण जैसी जानकारी उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।
त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक निगरानी के साथ कारोबारियों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। मिठाई निर्माताओं और विक्रेताओं को कच्चे माल की खरीद, स्वच्छता, उचित भंडारण तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए।
दीपावली खुशियों और आपसी मिठास का पर्व है। ऐसे में थोड़ी-सी सतर्कता परिवार को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाने में मदद कर सकती है। जम्मू संभाग में दूध और खोए की बढ़ती मांग के बीच जरूरी है कि बाजार में आने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी रखी जाए और उपभोक्ता भी खरीदारी के दौरान सावधानी बरतें।