चांडिल। झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में रहने वाले किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने बहुप्रतीक्षित 'नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना' के क्रियान्वयन के लिए 607.0332 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चांडिल डैम के पानी को भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचाया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में सिंचाई की समस्या दूर होने और कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई। सरकार के इस निर्णय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
607 करोड़ रुपये से बदलेगी नीमडीह-कुकड़ू की तस्वीर
झारखंड सरकार ने नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए 607 करोड़ 3 लाख 32 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य चांडिल जलाशय में उपलब्ध पानी का उपयोग कृषि कार्यों में करना है।
योजना के तहत आधुनिक लिफ्ट सिंचाई प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक में जलाशय से पानी पंपों की सहायता से उठाकर पाइपलाइन के जरिए निर्धारित क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है।परियोजना के पूरा होने से ऐसे कृषि क्षेत्रों में भी सिंचाई की सुविधा विकसित हो सकेगी, जहां परंपरागत नहर प्रणाली से पानी पहुंचाना कठिन होता है।अब प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन से संबंधित अगली प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।14 पंचायतों की करीब 9,336 हेक्टेयर जमीन को सिंचाई का लक्ष्य
नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड के किसान लंबे समय से बेहतर सिंचाई सुविधा की मांग कर रहे हैं। इससे पहले झारखंड विधानसभा में भी इस परियोजना का मुद्दा उठाया गया था।सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, नीमडीह और कुकड़ू की 14 पंचायतों की लगभग 9,336 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना विचाराधीन थी।इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान खेती पर निर्भर हैं। पर्याप्त सिंचाई संसाधनों का अभाव कृषि उत्पादन के सामने एक प्रमुख चुनौती रहा है।हालांकि, प्रशासनिक मंजूरी के बाद परियोजना के अंतिम तकनीकी स्वरूप और वास्तविक सिंचाई क्षेत्र की पुष्टि विस्तृत कार्ययोजना के अनुसार होगी।
चांडिल डैम का पानी पहुंचेगा किसानों के खेतों तक
चांडिल डैम झारखंड की महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में शामिल है। इस जलाशय के पानी का उपयोग आसपास के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए करने की मांग लंबे समय से की जाती रही है।नई योजना के तहत चांडिल जलाशय से पानी उठाकर भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।इस व्यवस्था का एक संभावित लाभ यह होगा कि पानी के परिवहन के दौरान खुले चैनलों में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। हालांकि, वास्तविक जल बचत परियोजना के डिजाइन और संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेगी।लिफ्ट सिंचाई प्रणाली के जरिए ऊंचाई वाले कृषि क्षेत्रों तक भी पानी पहुंचाना संभव होता है। इससे उन किसानों को फायदा मिल सकता है जिनकी जमीन तक सामान्य नहरों के माध्यम से पानी नहीं पहुंच पाता।
बारिश पर निर्भरता होगी कम, खेती को मिलेगा बढ़ावा
नीमडीह और कुकड़ू के कई कृषि क्षेत्रों में किसान मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर रहते हैं। पर्याप्त बारिश नहीं होने पर खेती प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना के पूरा होने के बाद किसानों को आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित हो सकेगी। इससे खरीफ के साथ रबी फसलों की खेती की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित सिंचाई की सुविधा मिलने से किसान धान के अलावा दलहन, तिलहन, सब्जियों और अन्य नकदी फसलों की खेती भी कर सकते हैं।सिंचाई व्यवस्था बेहतर होने से किसानों को फसल चयन में अधिक विकल्प मिलेंगे। इससे कृषि उत्पादन और आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने में मददगार हो सकती है योजना
इस परियोजना को क्षेत्र के आर्थिक विकास से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में कृषि आजीविका का प्रमुख साधन है। यदि किसानों को समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है, तो फसल उत्पादन में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।परियोजना के जरिए कृषि गतिविधियों का विस्तार होने से खेती से जुड़े दूसरे व्यवसायों को भी लाभ मिल सकता है।कृषि उपकरण, बीज, खाद, परिवहन और कृषि उत्पादों के व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।इसके अलावा किसानों को वर्षा की अनिश्चितता से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इन लाभों का वास्तविक असर परियोजना के सफल और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
विधानसभा में भी उठ चुका है सिंचाई का मुद्दा
नीमडीह और कुकड़ू में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का मामला पहले भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर उठाया जा चुका है।विधायक सविता महतो ने विधानसभा में चांडिल डैम से सिंचाई, लिफ्ट सिंचाई परियोजना और डैम से प्रभावित विस्थापित परिवारों की समस्याओं का मुद्दा उठाया था।उन्होंने क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की थी।चांडिल डैम से प्रभावित गांवों के पुनर्वास संबंधी मामले भी लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। ऐसे में नई सिंचाई परियोजना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विकासात्मक पहल माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले भी दिए थे निर्देश
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इससे पहले जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं को गति देने के निर्देश दिए थे।इस बैठक में चांडिल बांध सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा की गई थी। नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना पर भी चर्चा हुई थी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसानों तक पानी पहुंचाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
अब परियोजना के जल्द क्रियान्वयन पर नजर
नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद अब किसानों की नजर इसके धरातल पर उतरने पर रहेगी।योजना के लिए आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाएं, निर्माण कार्य और पाइपलाइन नेटवर्क का विकास महत्वपूर्ण चरण होंगे। हालांकि, निर्माण कार्य शुरू होने और परियोजना पूरी होने की निश्चित समयसीमा की पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
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