गिरिडीह : जिले के गावां थाना क्षेत्र में मंगलवार को खाद की गुणवत्ता को लेकर किसानों का आक्रोश सामने आया। बगदेडीह मोड़ स्थित एक खाद दुकान पर दर्जनों किसानों ने पहुंचकर कथित तौर पर नकली डीएपी खाद बेचने का आरोप लगाया और जमकर हंगामा किया। किसानों का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले दुकान से डीएपी खाद खरीदी थी। खाद को खेतों में इस्तेमाल करने के बाद अपेक्षित असर नहीं दिखने पर किसानों को इसकी गुणवत्ता पर संदेह हुआ।
किसानों ने दुकान संचालक सुनील साव पर नकली खाद बेचने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का दावा है कि उन्हें भारतीय जन उर्वरक परियोजना के नाम पर डीएपी खाद उपलब्ध कराई गई थी। बोरे पर प्रधानमंत्री की तस्वीर भी लगी थी। किसानों के अनुसार उन्होंने करीब दो हजार रुपये प्रति बोरा की दर से खाद खरीदी थी।
खेतों में असर नहीं दिखने का दावा
किसानों का कहना है कि खाद खरीदने के बाद उन्होंने निर्धारित तरीके से खेतों में इसका इस्तेमाल किया। सामान्य तौर पर डीएपी खाद का उपयोग फसलों की शुरुआती वृद्धि के लिए किया जाता है। किसानों के अनुसार खाद डालने के बावजूद खेतों में अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दिया।
इसके बाद किसानों के बीच खाद की गुणवत्ता को लेकर चर्चा शुरू हुई। कुछ किसानों ने अपने स्तर पर खाद की जांच कराने की बात कही, जबकि अन्य किसानों ने दुकान संचालक से जवाब मांगने का फैसला किया। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान बगदेडीह मोड़ स्थित खाद दुकान पर पहुंचे और विरोध जताया।
किसानों के आक्रोश के कारण कुछ समय तक मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कथित नकली खाद की बिक्री की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की।
करीब दो हजार रुपये में खरीदी खाद
किसानों ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्होंने दुकान से डीएपी खाद के बोरे खरीदे थे। एक बोरे के लिए करीब दो हजार रुपये चुकाने का दावा किया गया है। किसानों के मुताबिक खाद के पैकेट पर प्रधानमंत्री की तस्वीर लगी थी और उसे भारतीय जन उर्वरक परियोजना के नाम से बेचा गया।
किसानों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और प्रतिष्ठित नाम से जुड़ी खाद समझकर उन्होंने इसे भरोसे के साथ खरीदा। लेकिन खेतों में इस्तेमाल के बाद जब फसल पर अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखाई दिया तो उन्हें खाद की गुणवत्ता पर संदेह हुआ।
किसानों ने सवाल उठाया कि यदि खाद वास्तव में मानक के अनुरूप नहीं थी तो उसे बाजार में कैसे बेचा गया। उनका कहना है कि खेती पहले से ही महंगी होती जा रही है और नकली या घटिया खाद के कारण किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता
किसानों के लिए खाद की गुणवत्ता का सीधा संबंध फसल की पैदावार से होता है। खेती के मौसम में किसान बीज, खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर बड़ी रकम खर्च करते हैं। यदि खाद मानक के अनुरूप नहीं हो और फसल प्रभावित हो जाए तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बगदेडीह मोड़ पर विरोध करने पहुंचे किसानों ने कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से खाद खरीदी थी। यदि खाद खराब या नकली निकलती है तो उनके खेतों में हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा, यह बड़ा सवाल है।
किसानों ने संबंधित विभाग से मामले की जांच कर खाद के नमूने की प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खाद वास्तव में मानक के अनुरूप थी या नहीं।
जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल किसानों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी खाद को नकली या अमानक घोषित करने के लिए अधिकृत विभाग की जांच और प्रयोगशाला रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। इसलिए खाद के नमूने की वैज्ञानिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यदि जांच में खाद के नकली या अमानक होने की पुष्टि होती है तो संबंधित दुकान संचालक और आपूर्ति से जुड़े लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि खाद मानक के अनुरूप पाई जाती है तो किसानों को भी स्थिति की सही जानकारी मिल सकेगी।
कृषि विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण
मामले में कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका अहम हो जाती है। किसानों की शिकायत के बाद दुकान से खाद के नमूने लेकर उनकी जांच कराना, बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच करना और खाद की आपूर्ति कहां से हुई, इसका पता लगाना जरूरी होगा।
इसके अलावा यह भी देखा जाना चाहिए कि दुकान के पास संबंधित खाद की बिक्री के लिए वैध लाइसेंस और आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे या नहीं। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो कार्रवाई की जा सकती है।
किसानों ने कार्रवाई की मांग की
हंगामा कर रहे किसानों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि खाद की बिक्री में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी फसल और आमदनी पर पड़ता है।
किसानों ने यह भी मांग की कि यदि खाद जांच में अमानक या नकली पाई जाती है तो प्रभावित किसानों को उचित राहत दिलाई जाए। उनका कहना है कि केवल दोषियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जिन किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है, उनके हितों की भी रक्षा होनी चाहिए।
बगदेडीह मोड़ की इस घटना ने एक बार फिर कृषि सामग्री की गुणवत्ता और बाजार में बिकने वाली खाद की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब किसानों की नजर जांच और विभागीय कार्रवाई पर है। खाद के नमूनों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किसानों के आरोप कितने सही हैं और कथित डीएपी खाद की वास्तविक गुणवत्ता क्या थी।