रांची। हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन लिमिटेड (एचईसी) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिक्री में करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। कंपनी ने उत्पादन गतिविधियों को तेज किया और पुराने लंबित ऑर्डरों को पूरा करने पर जोर दिया, जिससे राजस्व में सुधार देखने को मिला है। हालांकि उत्पादन और बिक्री में सुधार के बावजूद कंपनी की आर्थिक स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। कर्मचारियों के वेतन भुगतान, कार्यशील पूंजी की कमी और वित्तीय दबाव जैसी समस्याएं अब भी एचईसी के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
प्रबंधन ने पहली तिमाही के प्रदर्शन की विस्तृत रिपोर्ट भारी उद्योग मंत्रालय को भेजी है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच एचईसी की बिक्री लगभग 10.01 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी की बिक्री करीब 5.89 करोड़ रुपये थी। इस तरह कंपनी ने लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। प्रबंधन का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उत्पादन बढ़ाने और लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के प्रयास किए गए, जिसका सकारात्मक असर बिक्री पर दिखाई दिया है।
एचईसी के तीनों प्रमुख प्लांटों में उत्पादन गतिविधियों में तेजी आई है। फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी), हैवी मशीन बिल्डिंग प्लांट (एचएमबीपी) और हैवी मशीन टूल्स प्लांट (एचएमटीपी) में पहले की तुलना में कामकाज बेहतर हुआ है। कंपनी ने रक्षा क्षेत्र, इस्पात उद्योग, रेलवे और खनन क्षेत्र से जुड़े पुराने ऑर्डरों को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया है। इन क्षेत्रों से मिले कार्यों को समय पर पूरा करना कंपनी के लिए राजस्व बढ़ाने का बड़ा जरिया बन सकता है।
हालांकि उत्पादन में सुधार के बावजूद एचईसी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पा रही है। कंपनी की कई मशीनें पुरानी हो चुकी हैं और उनके रखरखाव के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है। मशीनों की खराब स्थिति, कच्चे माल की उपलब्धता में परेशानी और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।
एचईसी के लिए मौजूद ऑर्डर बुक एक बड़ी उम्मीद बनी हुई है। कंपनी के पास सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की कई इकाइयों से मिले ऑर्डर हैं। प्रबंधन का प्रयास है कि इन परियोजनाओं को तेजी से पूरा कर कंपनी की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी को पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो जाती है तो एचईसी अपनी उत्पादन क्षमता को काफी बढ़ा सकती है।
दूसरी ओर, कंपनी की वित्तीय स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। कर्मचारियों का वेतन कई महीनों से लंबित है। इसके अलावा भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य जरूरी भुगतान का दबाव भी कंपनी पर बना हुआ है। वित्तीय संकट के कारण कर्मचारियों में भी असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल बिक्री और उत्पादन बढ़ने से एचईसी की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। कंपनी के पुनरुद्धार के लिए केंद्र सरकार की आर्थिक सहायता, नए निवेश, आधुनिक मशीनों की व्यवस्था और पर्याप्त कार्यशील पूंजी की जरूरत होगी। यदि समय रहते जरूरी कदम उठाए जाते हैं तो एचईसी दोबारा देश के भारी इंजीनियरिंग क्षेत्र में अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकती है।
एचईसी कभी भारत की प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनियों में शामिल रही है और देश के बड़े औद्योगिक परियोजनाओं में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में कंपनी सुधार की दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है, लेकिन वित्तीय चुनौतियां अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई हैं। पहली तिमाही के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि उत्पादन और बिक्री में सुधार की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन आर्थिक पुनरुद्धार के लिए लंबा रास्ता तय करना बाकी है।